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पुरुषों द्वारा त्याग दी गयीं दो महिलाओं की त्रासदी है ‘रोमा’

फ़िल्म-समीक्षा :: सुधाकर रवि एक दृश्य है जहाँ मुख्य पात्र क्लेओ समंदर में डूब रहे अपनी मालकिन के  दो बच्चों को बचाने जाती है. क्लेओ को तैरना नहीं आता,  और संभव है वह खुद भी डूब जाए, लेकिन बारी-बारी वह उन दोनों बच्चों को समंदर की धार से बाहर लाती है. इस घटना के बाद क्लेओ अपने मन की बात कहती है कि उसकी बेटी जो मरी हुई पैदा हुई थी, को वह जन्म नहीं देना चाहती थी, और उनका पिता उन दोनों का त्याग कर चुका...

राबर्ट ब्रेसां का मर्मस्पर्शी सिनेमा

फ़िल्म समीक्षा:: सैयद एस. तौहीद फिल्मकार रॉबर्ट  ब्रेसां को सिनेमा का संत कहा जाना चाहिये जिनकी कविताई अभिव्यक्ति ‘Au Hasard Balthazar‘ को मर्मस्पर्शी सिनेमा  का ताज़ जाएगा. यह फिल्म गधे अथवा गर्दभ समान निरीह प्राणी के जीवन का भावपूर्ण डॉक्युमेंटेशन  करने में सफल रही थी. उस पशु के जन्म से लेकर अन्तोगत्वा मर जाने तक की यात्रा को इसमें समाहित करने का महान काम किया गया. बल्टजर सारे समय...

मुल्क बंटता है दिमाग में

फ़िल्म समीक्षा :: प्रभात प्रणीत देश, राष्ट्र, मुल्क की परिभाषा क्या होनी चाहिए इस बारे में कभी ज्यादा सोचा नहीं था, लेकिन जब भी जितना भी सोचा, इसकी किताबी परिभाषा से ज्यादा प्रभावित नहीं हो पाया. मुल्क फिल्म में आरती मोहम्मद के चरित्र को निभा रही तापसी पन्नू जब कोर्ट में बोलती है कि “मुल्क कागज पर नक्शों की लकीरों से नहीं बंटता बल्कि मुल्क बंटता है दिमाग में, जाति में, धर्म में, नस्ल में, हम और वो...

Nolan’s Dunkirk : of misery, melancholy and Hope!

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Film Review :: Anchit Dunkirk will be appreciated world wide and rightly so. It was a houseful on the first day  in Patna. I had to watch it in 2D on the second day. Three is the number you are conscious of when you are watching it. The story takes place at three places- on land, in water and in air. There are three major perspectives – the private’s, the pilot’s and one from...