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हैशटैग कलकत्ता

 यायावरी : अंचित कलकत्ता जाने की तैयारी मैं जाने कब से कर रहा था.  मेरी पहली प्रेयसी के गिटार की आवाज़ सन बारह से मुझे पुकार रही थी, उसका भेजा एक-एक गीत थोड़ा और रवीन्द्र को पास लाता. मुझे बेलूर के घाट, तस्वीरों से खींचते थे. स्मृति में गंध बहुत सालों बाद भौतिक एहसासों के बाद ही बस पाती है, उसके बाद भी उसे बार-बार रिकॉल करना असम्भव सा होता है. सन बारह में कलकत्ता जीतने और जीने के ख़्वाब देखने...