मैं यह कविता तुम्हें दे रहा हूँ

कविता ::
जिमी सैंटीआगो बाका
अनुवाद : सत्यम सोलंकी

जिमी सैंटीआगो बाका | छवि साभार : Poetry foundation

मैं यह कविता तुम्हें दे रहा हूँ,
क्योंकि मेरे पास देने के लिए कुछ और नहीं
इसे रखना गर्म कोट की तरह
जब सर्दियाँ आए तुम्हें अपने आगोश में लेने के लिए.
इसे रखना मोटे मोजे की एक जोड़ी की तरह
जिससे ठंड काट नहीं सके.

मैं तुमसे प्यार करता हूँ,

मेरे पास तुम्हें देने के लिए कुछ और नहीं,
इसलिए यह पीले मकई से भरा एक बर्तन है
सर्दियों में तुम्हारे पेट को भरा रखने के लिए ,
यह तुम्हारा दुपट्टा है , अपने बालों पर,
अपने चेहरे के चारों ओर बाँधने के लिए,

मैं तुमसे प्यार करता हूँ,

इसे रखो उस तरह जैसे तुम इसे सहेजती अगर तुम खो जाती,
और सही दिशा की तलाश में होती.
जंगल में जीवन परिपक्व हो जाता है;
और इसे रखो अपने दराज के कोने में इस तरह छुपा कर
जैसे ये एक केबिन हो या कोई छोटी झोपड़ी घने पेड़ों के बीच.
तुम दस्तक देना और मैं उत्तर दूंगा, तुम्हें दिशा- निर्देश दूँगा ,
और मैं तुम्हें आग के पास ख़ुद को गर्म करने दूँगा, वहाँ आराम करना
खुद को सुरक्षित महसूस करना.

मैं तुमसे प्यार करता हूँ,

मैं तुम्हें इतना ही दे सकता हूँ
और सभी को जीने के लिए बस इतने की जरूरत है,
और इतने से ही भीतर भीतर जिया जा सकता है
जब बाहर की दुनिया परवाह नहीं करती
कि आप जीवित रहते हैं या मर जाते हैं,

मैं तुमसे प्यार करता हूँ.

•••

सत्यम सोलंकी अंग्रेज़ी के छात्र हैं और साहित्य पढ़ने लिखने की कोशिश में लगे रहते हैं. उनसे satyamsholankey@gmail.com पर बात हो सकती है.

About the author

इन्द्रधनुष

जब समय और समाज इस तरह होते जाएँ, जैसे अभी हैं तो साहित्य ज़रूरी दवा है. इंद्रधनुष इस विस्तृत मरुस्थल में थोड़ी जगह हरी कर पाए, बचा पाए, नई बना पाए, इतनी ही आकांक्षा है.

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