Tagavadheshpreet

हमजमीन

  कहानी :: हमजमीन : अवधेश प्रीत ‘तू सोता क्यों नहीं ? नींद नहीं आ रही क्या ?’ आवाज में खीझ थी, बेचैनी की हद तक. ‘हां नींद नहीं आ रही. हर कोशिश करके देखी ली.’ प्रत्युत्तर में, उभरे स्वर की लाचारी छुपी न रह सकी. ‘क्या बात है, बहुत दुखी लग रहा है तू ?’ पहली आवाज में यकायक सहानुभूति की तरलता आ गई थी. ‘दुख अपनी जगह है, नींद का न आना अपनी जगह. दोनों का एक-दूसरे से रिश्ता हो ही कोई जरूरी नहीं.’ दूसरी...