Sanjay Kumar Kundan

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साहित्यिक अभिरुचि पारिवारिक विरासत में मिली. पिता राधा प्रसाद जाने-माने कथाकार थे.

रचनाएँ – ग़ज़लों , नज़्मों के चार संग्रह प्रकाशित. बेचैनियाँ ( 2002 ), एक लड़का मिलने आता है ( 2006 ) और तुम्हारी बेक़रारी (2013) भले तुम और भी नाराज हो जाओ. कांचा इलैया की पुस्तक ‘पोस्ट हिन्दू इंडिया’ के अनुवाद सहित अन्य अनुवाद प्रकाशित.

सम्प्रति – स्वतंत्र लेखन
Ek-Ladka-Milane-Aata-Hai/
http://kavitakosh.org/kk/sanjay-kumar-kundan


 

 

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