कविताएँ : यानिस रित्सोस
अनुवाद एवं प्रस्तुति : अंचित

1). स्वीकार

मद्धिम नीले से हारा हुआ
अपनी खामोशी के घुटनों पर अपना सर टिकाए

बेतरह हारा हुआ जीवन से
बेतरह हारा हुआ जवानी से
अपनी आग में ही धँसा हुआ
और उसकी काँखों में सिवार हिलोर लेते हुए—

दिन की लहर को कोई प्रतिरोध नहीं मिला
कंकड़ भर भी उसके किसी ख्याल का

इसलिए वह तैयार था प्यार के लिए
और मौत के लिए।

2). बचकाना

उस छोटे बंदरगाह पर समंदर नक़्ल करता है
पत्तों की, बादल की और चिड़ियों की
ख़ूबसूरती से, सावधानीपूर्वक और सुलेख की तरह—
समय समय पर तेज हवा, उसकी गलतियों को
गाढ़ी नीली रेखाओं से चिह्नित करती है।

पर वह जो दिन भर लिखता है, समंदर को घूरता,
कोई गलती नहीं करता—(मेरी शिकायतों से भरी शांति) –
और बिना कुछ कहे इस चाहत में रहता है
कि प्यार आए और उसके दिल को घेरे—
उसकी इकलौती गलती।

3). तीन पंक्तियाँ

आसमान तुम्हारे भरोसे छोड़ता है अपना सारा हल्का नीलापन।
तुम्हारे कंधे दिन भर उसका बोझ कैसे उठाएँगे?
तुम्हारे गीतों की पसलियाँ कैसे उठायेंगी उसका बोझ?

4). खामोशी भरी बिछुड़न

उसने अपनी जैकेट उतारी और चली गई बिना आँसू बहाए
जैसे उसने गर्मी के आसमान से चाँद उतार दिया।

उसे भरोसा नहीं हुआ, वह उस रात इंतज़ार करता रहा
उसके अगले दिन, उसके भी अगले दिन।

चाँद के बदल जाने के साथ-साथ दो हफ़्ते निकल गए
वह समझ गया कि वह नहीं आएगी।

सिर्फ़ आईना बचा था
खुली खिड़की की तरह,
यह याद करने के लिए
एक बिना चाँद के आसमान में,

वह अपनी जैकेट अपने साथ ले गई!

5). बैरक में

चाँद बैरक में घुसा
और सैनिकों के कंबलों में कुछ ढूँढ़ता फिरा।
एक सो रही कोरी बाँह को छुआ,
कोई नींद में बात करता है, कोई खर्राटे लेता है।
एक लंबी दीवार पर एक छाया इशारे करती है।
आख़िरी ट्रॉली बस ख़ामोशी से चली गई।

क्या ये सब कल मृत होंगे?
क्या ये सब अभी से मृत हैं?

एक सैनिक उठता है
वह शीशे जैसी आँखों से आसपास देखता है।
ख़ून का एक धागा टंगा है चाँद के होंठों से।

6). सरलता का अर्थ

मैं सरल चीज़ों के पीछे छिपता हूँ
ताकि तुम मुझे खोज सको।

अगर तुम मुझे न खोज सकी तो ये चीज़ें खोज लोगी
तुम वह छुओगी जिसे मेरे हाथों ने छुआ है
हमारे हाथों के निशान जुड़ जायेंगे।

अगस्त का चाँद रसोई पर चमकता है
जैसे कोई टिन के तले वाला बर्तन हो। (वह ऐसा है क्योंकि मैं यह कह रहा हूँ)
वह ख़ाली घर को रौशन करता है।
घर का झुका हुआ सन्नाटा- सन्नाटा हमेशा झुका हुआ होता है।

हर शब्द एक निकास है
उस मुलाक़ात के लिए जो लंबित है।
वह शब्द सच है क्योंकि
वह मिलने की ताकीद करता है।

7). एक चेहरा

वह एक चमकदार चेहरा है, ख़ामोश, बिल्कुल अकेला
जैसे समूचा अकेलापन, जैसे समूची जीत अकेलेपन पर।

यह चेहरा
तुम्हारी तरफ़
ठहरे हुए पानी के दो खंभों के बीच से
देखता है

तुम नहीं जानते कि
दोनों में से कौन तुम्हें ज़्यादा भरोसा दिलाता है।

8). अचानक

ख़ामोश रात ख़ामोश     और तुम रुक गई थी।
इंतज़ार करती, लगभग ख़ामोशी थी।
अचानक तुमने अपने चेहरे पर महसूस किया
अदृश्य का स्पर्श।    वह आयेगा फिर।

तुमने खिड़की के पलड़ों को एक दूसरे से टकराते सुना
पंख उड़ आए और थोड़ी दूर- समंदर अपनी आवाज़ में डूब रहा था।

9). नग्न

यहाँ इस अस्तव्यस्त कमरे में
धूल से भरी किताबों और
बूढ़े लोगों की तस्वीरों के बीच
हाँ और ना की कई परछाइयों के नज़दीक
स्थिर रौशनी का बस एक बेड़ा

यहाँ इसी जगह पर
एक रात जहाँ तुमने कपड़े उतारे थे।


यानिस रित्सोस प्रसिद्ध ग्रीक कवि हैं। उन्होंने खूब लिखा और ग्रीक मिथकों से गहरे संवाद से लेकर ‘साधारण के उल्लास’ तक की कविताएँ उनके यहाँ मिल जाती हैं। उनकी कविताओं पर उनके आरंभिक जीवन में झेली गई यातनाओं का असर है। वह महान कवि हैं और एक कम्युनिस्ट।

अंचित से  anchitthepoet@gmail.com  पर बात हो सकती है।