कविता : तारानन्द वियोगी मैथिली से अनुवाद : अविनाश

छूटना

मुझे खेद है कि मैं आपके साँचे पर खरा नहीं उतर पाया !

मैंने अब तक देरीदा को नहीं पढ़ा फूको का कोई सिद्धान्त मुझे याद नहीं सचमुच मैं शर्मिन्दा हूँ

नहीं पढ़ पाया अब तक बेलिकोव्स्की, होर्खीमोर अडोर्नो या इतालो काल्विनो की कोई भी एक किताब

और तो और नामवर सिंह से एक मुलाकात तक ना कर पाया !

मुझे बहुत-बहुत दुख है कि ना मैं ठीक से सबअलटर्न समझता हूँ ना भाषण दे सकता हूँ पोस्ट मॉर्डनिज्म पर सच, बहुत-बहुत दुख है !

लेकिन भाई मैं करता भी क्या कब वक़्त दिया मुझे गाँव ने चमोकन की तरह चिपकी रही धरती मुझसे मैंने तो बहुत मिन्नत की न मुझे छोड़ा मेरी माँ ने न धान के सोना कटोरा खेत ने.

छूटता है भाई हर किसी से कुछ न कुछ छूटता है !

क्या आप ही बता सकेंगे कि मौसम की पहली बूंद जब गिरती है धरती पर क्या तापमान होता है किसान के मन का ? क्या आप मेरे गाँव के उस मजूर की कथा बता सकेंगे जो पचास वर्षों से जोत रहा है भारतीय गणराज्य स्थित ज़मीन लेकिन, जिसके लिए झोपड़ी भर धरती इस देश के पास नहीं है ?

क्या आप जानते हैं कि जट-जटिन खेलतीं मेरी बहनें क्यों डालती हैं मेढ़कों को ओखल में ? गाँव की बहू बेटियाँ सामा चकेवा के गीतों से किसे बुलाती हैं ?

और तो और आप तो शायद यह भी नहीं जानते कि हर सूखे के बाद क्या बुदबुदाता है बूढ़ा बड़गद और हर बाढ़ के बाद नदी क्यों पछताती है ? उस पोस्ट ग्रेजुएट का नाम ही बता दें आप जो नेहरू चौक पर पान की दुकान चलाता है ? या फिर उस लड़की की गाथा जिसे सम्भ्रान्त भाई वेश्यालय में बेच आया था ?

मैंने कहा न छूटता है हर किसी से कुछ न कुछ छूटता ही है।

•••

तारानन्द वियोगी मैथिली-हिन्दी के प्रतिष्ठित रचनाकार हैं. इनकी सृजनात्मक तथा आलोचनात्मक- दोनों ही प्रकार के लेखन में समान रुचि एवं गति है, किन्तु मूलतः कवि हैं. कहानियाँ भी लिखी हैं और आलोचनात्मक पुस्तकें भी. उग्रतारा पीठ महिषी (सहरसा) में जन्मे वियोगी संस्कृत से साहित्याचार्य हैं और मैथिली में दलित साहित्य के प्रवक्ता के रूप में भी जाने जाते हैं. यात्री-नागार्जुन और राजकमल चौधरी पर संस्मरण भी लिख चुके हैं. उनसे tara.viyogi@gmail.com पर सम्पर्क सम्भव है.

अविनाश कवि, पत्रकार, फ़िल्म निर्देशक हैं. कविता संग्रह के साथ-साथ मोहन श्रोत्रिय के साथ मिलकर पाँच किताबों का लेखन किया है. प्रभात ख़बर के पटना और देवघर संस्करण के स्थानीय सम्पादक रह चुके हैं. एनडीटीवी में आउटपुट एडिटर होने के साथ भोपाल संस्करण डीबी स्टार का भी सम्पादन किया है और ‘अनारकली ऑफ आरा’ शीर्षक से एक हिंदी फ़िल्म का लेखन-निर्देशन कर चुके हैं.