सत्रह की उम्र में कौन गम्भीर होता है. 

कविता ::
आर्थर रिम्बौ
अनुवाद एवं प्रस्तुति :
अंचित

आर्थर रिम्बौ

आर्थर रिम्बौ विश्व कविता का जाना पहचाना नाम हैं. फ़्रेंच में लिखने वाले रिम्बौ ने पच्चीस की उम्र के बाद कविता नहीं लिखी और ग़ुलामों के व्यापार में लग गए. उनके बाद आने वाले कई यूरोपियन कवियों पर उनका प्रभाव साफ देखा जा सकता है. मेरे लिए रिम्बौ प्रथम अनुभवों और सहज जुनूनी प्रेम के कवि हैं. उनकी कविता का कैरेक्टर वही है जिसमें देह अपनी सम्पूर्णता में बिना किसी वर्जना के स्थापित होती है. फ़्रायड का एरॉस, बेरोकटोक. यह कविता अपनी सूक्ष्मता के साथ उसी ओर इशारा करती है जैसे. अपने आग्रहों और दुराग्रहों के साथ. कवि की बुनावट में विरोधाभास गुँथे होते हैं. उसका स्वीकार अभिधा में असम्भव है. इस कविता और कवि की याद मुझे बेर्तोलूचि कीद ड्रीमरफिर से देखते हुए आयी. ईसाबेला ही वह लड़की थी जो किसी जून में मेरी ओर मुड़ी थी. ईसाबेला के कई नाम थे. उससे 1870 में भी प्रेम किया जा सकता था और 2019 में भी. यह भी कह देना चाहिए कि कवि सत्रह से जैसे ही अठारह का होता है, कविता लिखना छोड़ देता है. इस कविता का शीर्षक अंग्रेज़ी में ‘novel है और कई जगह ‘romance’. ‘Novel’ का अनुवादउपन्यासना कर इरादतनप्रथम अनुभवकिया गया है. – अंचित 

प्रथम अनुभव 

I
सत्रह की उम्र में कौन गम्भीर होता है.

एक हसीन रात को जब शराब और शिकंजी
और किसी कॉफ़ी हाउस से आते
तेज संगीत की ज़रूरत नहीं होती – 
तुम हरे नींबू के पेड़ों के नीचे रास्ते पर टहलते हो.

सुंदर जून की रातों को नींबू के पेड़ क्या ख़ूब महकते हैं.
कई बार तो हवा इतनी मीठी होती है कि तुम आँखें बंद कर लेते हो;
हवा ध्वनि लिए आती है  शहर पास है
साथ हवा के शराब और अँगूर के बगीचों की गंध

II
वहाँ दूर, जैसे एक शाख़ से अड़ा हुआ,
किसी तस्वीर की माफ़िक़
एक गहरा नीला टुकड़ा आसमान का
किसी सितारे से बिंध गया,

सितारा धीमे धीमे स्पंदित होता,
कितना छोटा, सफ़ेद

जून की रातें! सत्रह की उम्र!
इसको अपने भीतर भरो
यह रस शैम्पेन है; सीधा दिमाग़ तक जाता है.
दिमाग़ भटकता है; तुम्हें महसूस होता है
होंठों पर एक चुम्बन, ज़िंदा हैकांपता हुआ

III
आवारा दिल हज़ार उपन्यासों से सफ़र करता है.

-और जब कोई जवान आकर्षक लड़की पास से गुजरती है
स्ट्रीट लैम्प की उदास रोशनी में,
अपने पिता के बड़े कॉलर की डरावनी परछाईं से दबीछिपी

क्योंकि गुजरते हुए, जूतों के हील से आवाज़ करती हुई,
वह मुड़ी थी एक पल, अपनी बड़ी आँखों से देखती,
तुम इतने प्यारे लगे, वह खुद को रोक नहीं पायी.

और कितने सारे गीत तुम्हारे होंठों पर मारे गए.

IV
तुम प्यार में हो. अगस्त तक अब तुम्हें प्यार नहीं होगा.
तुम प्यार में हो.

– तुम्हारे सॉनेटों से उसे हँसी आएगी.
तुम्हारे दोस्त तुम्हें छोड़ गए हैं,
तुम एक बुरी खबर की तरह हो.

– फिर, एक रात, तुम्हारी जानेमन, तुमको ख़त लिखेगी

उस रात
तुम शोर करते कॉफ़ी हाउसों की तरफ़ लौटोगे;
शिकंजी या शराब मँगवाओगे

– सत्रह की उम्र में कोई गम्भीर नहीं होता
जब रास्ते के दोनों तरफ़ नींबू के पेड़ लगे होते हैं. 

***

अंचित कवि हैं.  उनसे anchitthepoet@gmail.com पर बात हो सकती है. 

 

 

About the author

इन्द्रधनुष

जब समय और समाज इस तरह होते जाएँ, जैसे अभी हैं तो साहित्य ज़रूरी दवा है. इंद्रधनुष इस विस्तृत मरुस्थल में थोड़ी जगह हरी कर पाए, बचा पाए, नई बना पाए, इतनी ही आकांक्षा है.

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