दुःख एक पैसेंजर ट्रेन की तरह है

कविताएँ ::
रोहित ठाकुर

रोहित ठाकुर

1). एकांत में उदास औरत

एक उदास औरत चाहती है
पानी का पर्दा
अपनी थकान पर

वह थोड़ी सी जगह चाहती है
जहाँ छुपाकर रख सके
अपनी शरारतें

वह फूलों का मरहम
लगाना चाहती है
सनातन घावों पर
वह सूती साड़ी के लिए चाहती है कलप

और
पति के लिए नौकरी

बारिश से पहले वह
बदलना चाहती थी कमरा
जाड़े में बेटी के लिए बुनना
चाहती है ऊनी स्कार्फ

बुनियादी तौर पर वह चाहती है
थोड़ी देर के लिए
हवा में संगीत.

2). लापता होती औरतें

जब औरतें लापता होती हैं
आस पास का पर्यावरण
अपनी मुलायमियत
खो देता है

औरतें लापता हो रही है
भूख से
फिर हिंसा से
औरतें लापता हो रही है
असमय मौत से
औरतें ही बचा सकती है
इस धरती पर जो कुछ भी सुन्दर है

पर वह
विपदा में है
किसी भी देश में
जब खेतों और जंगलों को
खत्म कर दिया जाता है

वहाँ से औरतें लापता हो जाती है
जहाँ सूख जाती है नदियों और झरनों का पानी
वहाँ से औरतें लापता हो जाती है

औरतें लापता हो जाती है अभाव में
औरतें अभाव को अभिव्यक्त नहीं करती
और लापता हो जाती है

औरतें लापता हो रही है
क्रुर लापरवाही से.

3). सुख और दुःख

उसने कहा सुख जल्दी थक जाता है
और दुःख एक पैसेंजर ट्रेन की तरह है

उसने सबसे अधिक गालियाँ
अपने आप को दीं

उसका झगड़ा पड़ोस से नहीं
उस आकाश से है जो
तारों को आत्महत्या के लिए उकसाता है

उसने सबसे डरा हुआ आदमी
उस पुलिस वाले को माना
जो गोली मार देना चाहता है सबको

वह चाहता है कि एक
धुएँ का पर्दा टंगा रहे
हर अच्छी और बुरी चीज़ के बीच

ताकि औरतों और बच्चों के सपनों पर
चाकू के निशान न हों.

4). कविता

यूरोप में बाजार का विस्तार हुआ है
कविता का नहीं

कुआनो नदी पर लम्बी कविता के बाद
कई नदियों ने दम तोड़ा

लापता हो रही हैं लड़कियाँ
लापता हो रहे हैं बाघ
खिजाब लगाने वालों की संख्या बढ़ी है

इथियोपियाई औरतें इंतजार कर रही हैं
अपने बच्चों के मरने का

संसदीय इतिहास में भूख एक अफ़वाह है
जिसे साबित कर दिया गया है

सबसे अधिक पढ़ी गई प्रेम की कविताएँ
पर उम्मीदी से अधिक हुईं हैं हत्यायें
चक्रवातों के कई नये नाम रखे गये हैं
शहरों के नाम बदले गये

यही इस सदी का इतिहास है
जिसे अगली सदी में पढ़ाया जायेगा
इतिहास की कक्षाओं में

राजा के दो सींग होते हैं
सभी देशों में
यह बात किसने फैलायी है –
हमारी बचपन की एक कहानी में
एक नाई था बम्बईया हज्जाम उसने.

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रोहित ठाकुर चर्चा पा रहे कवि हैं. विभिन्न प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्र – पत्रिकाओं  हंस, बया, दोआब, समकालीन हिन्दी साहित्य, अक्षर पर्व, ककसाड़, समहुत, सदानीरा, किरण वार्ता आदि  में उनकी कविताएँ प्रकाशित हो चुकी हैं. उनकी कविताओं के मराठी और पंजाबी भाषा में अनुवाद भी प्रकाशित हैं. उनसे rrtpatna1@gmail.com पर सम्पर्क किया जा सकता है.

About the author

इन्द्रधनुष

जब समय और समाज इस तरह होते जाएँ, जैसे अभी हैं तो साहित्य ज़रूरी दवा है. इंद्रधनुष इस विस्तृत मरुस्थल में थोड़ी जगह हरी कर पाए, बचा पाए, नई बना पाए, इतनी ही आकांक्षा है.

2 comments

  • बहुत अच्छी रचनाएं🎉 रोहित जी को हार्दिक शुभकामनाएं

  • बहुत अच्छी कविताएँ। रोहित को बधाई ।