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सकीना की चूड़ियाँ

कहानी :: ज़ोहरा सईद अनुवाद : श्रीविलास सिंह सकीना की चूड़ियाँ जब मैं दस साल की थी, मेरी ही उम्र की मेरी एक सहेली थी जिसका नाम सकीना था। जब हम मित्र थे, उस समय मेरे परिवार में छः बेटियाँ थीं। तब तक मेरे दोनों छोटे भाई पैदा नहीं हुए थे। सकीना सात बड़े और विवाहित बेटों के बाद की एक मात्र बेटी थी। वह हमारे घर के ठीक सामने रहती थी किन्तु उसके पिता बहुत सख़्त थे इसलिए उसे घर से बाहर लम्बे समय तक खेलने की...

तूतनखामेन तुम्हारी नब्ज़….किस कलाई में चल रही है!!

कहानी :: अनघ शर्मा तूतनखामेन तुम्हारी नब्ज़….किस कलाई में चल रही है!! 1 धांय से गोली छूटती है और चीथड़े हवा में बिखर जाते हैं…….. परिंदे घबरा के चुप हो जाते हैं.  फिर जब उनके हवास कायम होते हैं तो उन्हें पता चलता है कि कुछ साथी उनका साथ छोड़ कर चले गये हैं.  दो घड़ी सहमी हुई हवा रुक के ज़मीन पर गिरे हुए उन परिंदों को देखती है. उन्नीस बरस कितनी नाज़ुक उम्र होती है……ऐसी उम्र...

स्वप्न बुक

गद्य:: सौरभ पांडेय स्वप्न बुक “एक पक्षी के मरने पर कितने आसमान समाप्त हो जाते हैं” – नवारुण भट्टाचार्य सारी ध्वनियां दृश्य में रही हैं। मैं उन दृश्यों से भयभीत, उन्हें एक स्वप्न की तरह नोट कर रहा हूं। स्वप्न मुझे हाइड्रोफोबिया है। मुझे ऐसा लग रहा है कि मेरे आस पास की सारी चीजें, मेरे सारे खयाल, मेरे सारे अहसास जाने क्यूं किसी नदी में तैरने को बेचैन हैं।मैं पुल के एक छोर पर खड़ा...

एक पुरानी पाण्डुलिपि

कहानी :: फ्रांज़ काफ़्का हिंदी अनुवाद : श्रीविलास सिंह  ऐसा लगता है कि हमारे देश की सुरक्षा व्यवस्था में बहुत बातों की अनदेखी की गयी है। अभी के पहले तक इस बात के प्रति हम स्वयं कभी चिंतित नहीं हुए थे और अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थे; लेकिन उन बातों ने, जो हाल में घटित हो रहीं थीं, हमें परेशान करना शुरू कर दिया है। सम्राट के महल के सामने स्थित चौराहे पर मेरी जूते गांठने की दूकान है। अभी भोर की...

उदासी एक मंजर है

कहानी :: अविनाश पीड़ा का एक शाश्वत सिद्धांत है कि उसकी तय समय-सीमा होती है, जिसके बाद वह निर्जीव हो जाती है. बड़ी से बड़ी दुर्घटना के बाद भी आपके पास स्मृति के कुछ छींटे रहते हैं जिनके साथ आप सांस ले रहे होते हैं, घर के काम कर रहे होते हैं, जीवन जी रहे होते हैं. मुझे अपने पिता की मृत्यु का दिन याद है, मैं दुखी था. जीवन में पहली मर्तबा कुछ स्वाभाविक था. पिता के मामले में चीज़ें इतनी आसान नहीं होती थीं...