यही वह शहर है जो तुमने खो दिया

कविता ::
कैरोलिन फोर्शे
अनुवाद : अंचित

इल्या कमिन्स्की यूक्रेनियन-अमेरिकी कवि हैं. कैरोलिन फ़ोर्शे अमेरिकी कवि हैं और यह कविता उनके संग्रह “इन द लेटनेस ऑफ़ द वर्ल्ड: पोअम्ज़” से ली गयी है.  

 निर्वासन”: इल्या कमिन्स्की के लिए

तुम्हारे बचपन का शहर, जैसे उठता है घास के मैदानों और समंदर के बीच से, गेहूँ और रौशनी के बीच से, बिलकुल सफ़ेद, सीपियों की धूल, तारे गिनने वालों और पाइपफ़िश की हड्डियों से बना, चूने-पत्थर का शहर जो इतना कोमल है कि उसे एक खुरपी से काटा जा सकता है, समुद्र जहाँ पसरता है और जहाँ ग्रीकों द्वारा अपने जहाज़ों पर कभी जो बबूल लाए गए, वे गर्मियों में सफ़ेद हो जाते हैं.

तो हाँ, तुम्हें याद है, यही वह शहर है जो तुमने खो दिया,
वायलिन वादकों और लूटेरों का शहर, शतरंज खेलने वाले और बंदर,
एक ओपेराघर, एक पागलखाना, एक भूतहा गिरजाघर जिसमें हवा ही गीत गाने वालों का समूह थी,
शहर जहाँ दो चीज़ों का कोई मतलब बनता था: अदब और जहाज़, कविता और समंदर.

अब अगर तुम लौटोगे यों वह दूसरों को जैसा दिखता है वैसा नहीं दिखेगा, और जब तुम गुज़रोगे वहाँ से, ऐसा नहीं लगेगा कि कोई व्यक्ति वहाँ से गुज़रा था. बल्कि ऐसा लगेगा जैसे कोई बहुत पुरानी भूली बात किसी को याद आ गयी हो और वह सोचने लगा हो, क्यों?अगर तुम लौटोगे, तुम्हारे पिता ज़िंदा होंगे ताकि तुम्हारे लिए मिंट और खीरे का सूप बना सकें या तुम्हें वह छोटी मिठाई दे सकें जिसको “बर्ड-मिल्क” कहा जाता है.
घंटों उनके साथ समुद्र के निकट उनकी खोई सैंडिलें खोजने के बाद
साथ साथ तुम जाओगे उसी पार्क में जहाँ तुम्हारे पुरखे दफ़्न हैं
और फिर उस घर जो उस अपार्टमेंट में है जिसे जंग के जर्मन बन्दियों ने बनाया था,
जिनको तुम्हारे पिता ब्रेड दिया करते थे, और तुमको याद है कि इस बात पर तुम्हें हैरत होती थी.

तुम ट्राम से एक ऐसे स्टाप तक जाते हो जहाँ अब उतरा नहीं जा सकता,
और वे तब तक तुम्हारे साथ चलते हैं जब तक वे ग़ायब नहीं हो जाते,
थामे-थामे ही अपने हाथों में तुम्हारा अदृश्य हाथ.

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अंचित कवि हैं. उनसे anchitthepoet@gmail.com पर बात हो सकती है.

About the author

इन्द्रधनुष

जब समय और समाज इस तरह होते जाएँ, जैसे अभी हैं तो साहित्य ज़रूरी दवा है. इंद्रधनुष इस विस्तृत मरुस्थल में थोड़ी जगह हरी कर पाए, बचा पाए, नई बना पाए, इतनी ही आकांक्षा है.

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