बड़ी देर लगा दी पर अच्छा हुआ आ गए

कविताएँ::
भगवत रावत

भगवत रावत  हिन्दी के प्रसिद्ध कवि हैं. उनके कई कविता संग्रह प्रकाशित हैं और इनकी कविताएँ रूसी भाषा में अनूदित हैं. इनके ‘समुद्र के बारे में’, ‘दी हुई दुनिया’ , ‘हुआ किस तरह’ आदि कविता संग्रह प्रकाशित हैं. निम्न कविताएँ ‘आधुनिक हिन्दी कविता संचयन से  आभार सहित ली गईं हैं. 

सच पूछो तो

एक ऐसी जगह खोजता रहा जीवन भर
जहाँ बैठकर बेफिक्री से
लिख पाता एक नाम
और कोई यह न पूछता
यह किसका नाम है

हरदम चक्कर खाते चौबीसों घंटे में से
इतना सा समय चाहिए था मुझे
जिसे आसानी से छिपाकर रख लेता
अपनी जेब में
और कोई यह न पूछता
उसे मैंने कैसे किया खर्च

भाषा से पटी पड़ी दुनिया में
कुछ ऐसे शब्द चाहिए थे मुझे जिन्हें
किसी अबोध लड़की के हाथों
गोबर लिपी ज़मीन पर
चौक की तरह पूर देता
और कोई यह न पूछता
इसका है क्या अर्थ

सच पूछो तो
इतने से कामों के लिए आया था पृथ्वी पर
और भागता रहा यहाँ से वहाँ.

न जाने कब से

न जाने कब से मिलना चाह रहा हूँ एक आदमी से जिससे मिलते ही गले लगने पर
दोनों की कमीज़ की जेब में रखे चश्मों के फ़्रेम दबकर सचमुच टूट जाएँगे

बातें करते-करते बीत जाएगी सारी रात
और खाना रखा-रखा ठंडा हो जाएगा

न जाने कब से लिखना चाह रहा हूँ एक लंबी चिट्ठी जिसका कोई ओर-छोर नहीं होगा
न जाने क्या-क्या नहीं लिखा होगा उसमें
और अंत में
कुछ भी न लिख पाने का अफ़सोस लिखा होगा

न जाने कब से जाना चाह रहा हूँ एक ऐसी जगह जहाँ पहुँचते ही बोल पड़े सारी जगह
अच्छा हुआ तुम आ गए
बड़ी देर लगा दी पर अच्छा हुआ आ गए.

***

About the author

इन्द्रधनुष

जब समय और समाज इस तरह होते जाएँ, जैसे अभी हैं तो साहित्य ज़रूरी दवा है. इंद्रधनुष इस विस्तृत मरुस्थल में थोड़ी जगह हरी कर पाए, बचा पाए, नई बना पाए, इतनी ही आकांक्षा है.

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