भूलने की चाह में मन की दिशा बदल जाती है

कविताएँ ::
शंकरानंद

याद के लिए

भूलने के लिए
किसी को बताना नहीं पड़ता
भूलने की चाह में
मन की दिशा बदल जाती है

दूसरे गैरजरूरी काम
याद आ जाते हैं
कोई पुरानी किताब
ध्यान खींच लेती है
कोई जंगली फूल
एकाएक अच्छा लगने लगता है

जिस बात से ऊब होती थी
वही सुनने का मन करता है
बस कोशिश यह रहती है कि
चाहे कुछ भी हो जाए
जो भूला हुआ है वह याद नहीं आए

याद के बारे में सबकुछ
इतना आसान नहीं होता
सब भीतर ही रहे तो
लगता है कुछ कमी रह गई है

याद आने के तरीके भी
अलग अलग हैं
कुछ लोगों को
बार-बार बताना पड़ता है कि
जो नहीं है उसकी याद आ रही है
फिर भी किसी ने ध्यान नहीं दिया तो
वह सोच में पड़ जाता है

वह दयनीय दिखना चाहता है
आइने में देखता है कि
उदासी जितनी चेहरे पर है
वह कम तो नहीं
इतनी कोशिश के बाद भी
बात नहीं बनती अगर

तब कभी उसकी
तस्वीरें लगाता है जो चला गया
कभी उसकी बातें दोहराता है
कभी आंसू बहाता है और देखता है कि
इससे कोई पसीज रहा है कि नहीं।

शातिर लोग

चीजों के नाम होने से
उनके बारे में जानना आसान होता है
अब जानकर भी कोई कुछ नहीं करता
चश्मदीद बनना
अपनी जान से हाथ धोना है

अनजान लोगों के नाम पता नहीं होते
उनके बारे में कुछ नहीं जानना ही
संदेह की शुरुआत होती है
कोई संदिग्ध हो जाता है रातों रात
फिर अगले दिन अखबार में
एक गुमनाम मौत की खबर छपती है

बीस पन्ने का अखबार है
उसमें आठ पन्ने पर
गुमनाम मौत की खबर
बताती है कि किस तरह
वैसे लोगों को ढूंढ़ा जाता है
जो मारे जाने लायक हैं

वे भागे हुए प्रेमी हो सकते हैं
घर छोड़ कर निकले लड़के
जो भावुकता में
रास्ता भटक गए और
निकल गए हजारों मील दूर

अब सबसे नजर बचाते
उनके दिन बीतते हैं
इसी बीच किसी की
नजर पड़ जाती है और
वे घेर लिए जाते हैं

किसी पर विश्वास करना कई बार
मौत के मुंह तक ले आता है
शातिर लोग मौके की
तलाश में रहते हैं कि
कौन है जो नया है इस शहर में
कौन है जो अकेला है
कौन है जो प्रेमी है
कौन है जो स्त्री
घर का रास्ता भूल गई
पागल और बदनसीब तो
इस सूची में पहले से हैं

बर्बर होना इतना आसान है अब कि
जिस चाकू से टमाटर कटता है
उसी से
प्यार में डूबी उंगलियों के
टुकड़े कर देते हैं लोग
गोद में चूमने के लिए सिर रखते हैं और
अगले ही पल
उतार लेते हैं एक औरत की गर्दन।

रहस्य की तरह

आसमान की परछाईं में
पृथ्वी का रंग कभी नीला हो जाता है
कभी काला
उसकी धूसर देह पर
फूलों की धारियां दूर से चमकती हैं
हरे की नसों का उभार
इसकी लंबी उम्र की कामना करता है

नदियों का पानी यूं तो
शीशे की तरह साफ है
ये और बात है कि
जब वे अपनी बहनों को
खोजने निकलती हैं तो
रास्ते में ही उनका
अपहरण हो जाता है और
वे रोती कलपती कीच से भरी
समुद्र में जाकर
आत्महत्या कर लेती हैं

चित्रकारों का कोई दोष नहीं
वे और बेहतर रचना चाहते हैं
लेकिन इससे आगे नहीं बढ़ पाते कि
उनकी पृथ्वी जितनी
कैनवास पर सुंदर और सुघड़ है
उतनी असल में अब नहीं रही

सब कुछ एक रहस्य की तरह लगता है
लेकिन इसमें रहस्य जैसा कुछ है नहीं

जिनके हाथ में रोटी बनाने की कला है
उन्हीं जैसे हाथों को
गला दबाने की कला में भी
निपुणता हासिल है

ये और बात है कि चेहरा देख कर
कोई इसका अंदाजा नहीं लगा सकता।

भार

साथ रहने की इतनी शर्त है कि
उसकी अवमानना में
बच गई है जिंदगी

पिंजरे के नियम की व्याख्या करने वाले
उसकी सुविधाओं का बखान करते हैं
उनके तर्क आप नहीं काट सकते

हर कोशिश के बावजूद आप
पराजित हो जाएंगे
एक दिन

जिन्हें पंख के बारे में नहीं पता
उनके लिए पंख एक भार है।

•••

शंकरानंद हिंदी के चर्चित कवि हैं। उनसे shankaranand530@gmail.com पर बात हो सकती है। 

About the author

इन्द्रधनुष

जब समय और समाज इस तरह होते जाएँ, जैसे अभी हैं तो साहित्य ज़रूरी दवा है. इंद्रधनुष इस विस्तृत मरुस्थल में थोड़ी जगह हरी कर पाए, बचा पाए, नई बना पाए, इतनी ही आकांक्षा है.

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