लड़कियाँ कोई मशीन नहीं हैं

स्त्री संसार ::
उद्धरण : सिल्विया प्लाथ
अनुवाद, चयन एवं प्रस्तुति : प्रिया प्रियदर्शिनी

सिल्विया प्लाथ एक अमेरिकी कवि, उपन्यासकार और लघुकथा लेखिका हैं। प्लाथ २० वीं सदी की सबसे आकर्षक लेखिका हैं। वेकनफेशनल पोएट्री’ के आंदोलन में एक प्रमुख व्यक्ति के रूप में सामने आईं और अक्सर एक महत्वपूर्ण स्त्रीवादी लेखिका के रूप में सम्मानित की जाती हैं। कोलोसस एंड अदर पोएम्स’ और  ‘एरियल’ उनके सबसे प्रसिद्ध कविता संग्रह हैं।डैडी’,लेडी  लैज़रस’ औरविडो’ उनकी लिखीं मेरी कुछ पसंदीदा कविताएँ हैं। उन्होंनेबेल जार’ नामक एक अर्धआत्मकथात्मक उपन्यास भी लिखा है। कलेक्टेड पोएम्स’ १९८१ में प्रकाशित हुआ और उसमें उनकी अप्रकाशित रचनाएँ भी शामिल थीं। इस संग्रह के लिए प्लाथ को १९८२ में पुलित्जर पुरस्कार मिला जिसे वह मरणोपरांत प्राप्त करने वाली चौथी हस्ती बनीं। अपनी रचनाओं में वह मृत्यु, उत्पीड़न, पितृसत्ता, प्रकृति, सेल्फ, बॉडी और मातृत्व के बारे में बात करती हैं।

एक स्त्री के रूप में जन्म लेना मेरी भयानक त्रासदी है। जिस क्षण से मुझे गर्भ में धारण किया गया, मैं लिंग और अंडकोश के बजाय स्तनों और अंडाशयों को अंकुरित करने के लिए अभीशप्त थी; मेरे अपरिहार्य स्त्रीत्व द्वारा मेरे पूरे कार्यक्षेत्र, विचार और भावना को कठोरता से प्रतिबध्द करने के लिए। हाँ, रोड क्रू, नाविकों और सैनिकों, बार रूम रेगुलर के साथ घुलने- मिलने की मेरी इच्छा- एक दृश्य का हिस्सा बनना, गुमनाम, सुनना, रिकॉर्ड करना-सब कुछ इस तथ्य से बर्बाद हो गया है कि मैं एक स्त्री हूँ, एक स्त्री हमेशा हमले और बैटरी के ख़तरे में। पुरूषों और उनके जीवन में मेरी उपभोग रूचि को अक्सर उन्हें बहकाने की इच्छा के रूप में, या इंटीमेसी के लिए निमंत्रण के रूप में गलत समझा जाता है। फिर भी, भगवान, मैं जितनी हो सके उतनी गहराई से हर किसी से बात करना चाहती हूँ। मैं खुले मैदान में सोना चाहती हूँ, पश्चिम की यात्रा करना चाहती हूँ, रात में स्वतंत्र रूप से चलना चाहती हूँ।

तो मुझे लगने लगा कि शायद यह सच है कि जब आपने शादी की और बच्चे हुए तो यह ब्रेनवॉश करने जैसा था, और बाद में आप एक अधिनायकवादी राज्य में एक सुन्न गुलाम की तरह रहने लगे।

लड़कियाँ कोई मशीन नहीं हैं जिसमें आप दयालुता के सिक्के डालते हैं और सेक्स बाहर आ जाता है।

एक पुरूष क्या है भविष्य में एक तीर है और एक स्त्री क्या है वह जगह है जहाँ से तीर चलाया जाता है।

विधवा। यह शब्द खुद को ही खा जाता है।

चुकि मेरी स्त्री की दुनिया को अधिकतम भावनाओं और इंद्रियों के माध्यम से देखा जाता है, इसलिए मैं इसे अपने लेखन में भी इसी तरह दिखती हूँ– और मैं अक्सर दबी रहती हूँ भारी वर्णनात्मक लेखों और उपमाओं के बहुरूपदर्शक के नीचे।

मैं सिर्फ इसलिए लिखती हूँ क्योंकि मेरे भीतर एक आवाज है जो शांत नहीं होगी।

जो चीज मुझे सबसे ज्यादा डराती है, वह है बेकार होने का विचार : अच्छी तरह से शिक्षित, शानदार ढंग से होनहार, और उदासीन अधेड़ उम्र में लुप्त हो जाना।

मैं अपने जीवन में संभव मानसिक और शारीरिक अनुभव के सभी रंगों, स्वरों और विविधताओं को जीना और महसूस करना चाहती हूँ, और मैं बहुत सीमित हूँ।

•••
प्रिया प्रियदर्शिनी कवि और अनुवादक हैं। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की पढ़ाई की है। उनसे priyapriyadarshni99@gmail.com पर बात हो सकती है।

About the author

इन्द्रधनुष

जब समय और समाज इस तरह होते जाएँ, जैसे अभी हैं तो साहित्य ज़रूरी दवा है. इंद्रधनुष इस विस्तृत मरुस्थल में थोड़ी जगह हरी कर पाए, बचा पाए, नई बना पाए, इतनी ही आकांक्षा है.

Add comment