स्त्री पुरुष से अलग है

न से नारी ::
उद्धरण : जूलिया क्रिस्तेवा
अनुवाद एवं प्रस्तुति : सृष्टि

जूलिया क्रिस्तेवा प्रसिद्ध दार्शनिक, विचारक, आलोचक और मनोविश्लेषक हैं. हाल के दिनों में उन्होंने एक उपन्यास भी लिखा है. उन्होंने बार्थ जैसे बड़े भाषा विज्ञानी-चिंतकों के साथ काम किया है और उनके विचार फूको, लकां आदि चिंतकों के विचार पर आधारित हैं.  उनकी ख्याति स्त्रीवादी के रूप में भी है और वे बूवुआ, सिक्षु और इरिग्रे के साथ फ़्रेंच स्त्रीवाद के मुख्य विचारकों में से गिनी जातीं हैं. 

स्त्री पुरुष से अलग है और उसी चीज़ से बनी है जो पुरुष में नहीं है. बाइबल की स्त्री एक पत्नी, बेटी और बहन हो सकती है या ये सभी चीजें एक साथ हो सकती है, लेकिन शायद ही कभी उसका अपना कोई नाम होता है.  उसका काम है, प्रजनन कैसे हो, इस बात का ख्याल रखना… समुदाय के कानून और उसके राजनीतिक और धार्मिक एकता से औरत का कोई सीधा रिश्ता नहीं है. भगवान अक्सर पुरुषों से ही संवाद करते हैं. (व्यंग्य)

सामाजिक संविदा में विश्लेषणात्मक स्थिति ही एक ऐसी स्पष्ट जगह दी गई है, जहां हम अपने द्वारा झेले हुए ज़ख्मों के बारे में बात कर सकते हैं. अपनी ऐसी नई पहचान खोज सकते हैं, जो सम्भव हो और अपने बारे में बात करने के नए तरीके खोज सकते हैं.

मैं उस कटे हुए सर से अपनी आँखें नहीं हटा सकती.  मैं कितना भी चाहूँ पर यही मेरा लक्षण है. अवसाद, मौत से विमोह, स्त्रैण और मानवीय परेशानियों की स्वीकृति, कैस्ट्रेशन ड्राइव? मैं इन सभी मानवीय, बहुत ही मानवीय चीजों को स्वीकार करती हूँ.

ईसाई धर्म की सबसे प्रभावशाली विरासतों में से है, किसी भी और सारी संस्थाओं के ऊपर सवाल उठाना। चाहे फिर वो सवाल किसी आस्था पर हो या फिर उससे जुड़ी किसी वस्तु पर. मानवतावाद, जो कि इसकी विद्रोही संतान है, इसे भी, इस विरासत को विकसित करने में पीछे नहीं रहना चाहिए.

अपने दुःखों को नाम देना, उसे ऊँचा बताना, उसे छोटे टुकड़ों में काट देना… निस्संदेह ये अपने दुःखों को दबाने का एक तरीका है.

किसी को क्या ये पहचानना चाहिए कि कोई भी दूसरे देश में विदेशी इसलिए हो जाता है क्योंकि वह मन से पहले से ही विदेशी है?

गर्भावस्था विनम्रता और कोमलता में एक ऐसी धीमी, कठिन और आनंद देने वाली अप्रेंटिसशिप है, जिसके दौरान इंसान ख़ुद को भूल जाता है.  इस राह में बिना अपने बौद्धिक, व्यावसायिक और छाप छोड़ने वाले व्यक्तित्व का विनाश किए बिना और बिना खुद को चोट पहुंचाए हुए, सफलता पाने की योग्यता एक बड़ी बात है.  एक निर्दोष मातृत्व की राह में बहुत कुछ दांव पर लगा रहता है.

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सृष्टि कवि और अनुवादक हैं. उनसे shristithakur94@gmail.com पर बात हो सकती है.

About the author

इन्द्रधनुष

जब समय और समाज इस तरह होते जाएँ, जैसे अभी हैं तो साहित्य ज़रूरी दवा है. इंद्रधनुष इस विस्तृत मरुस्थल में थोड़ी जगह हरी कर पाए, बचा पाए, नई बना पाए, इतनी ही आकांक्षा है.

1 comment

  • Dear admin me BHU me MSc agriculture ka student hu.shrishti ji se milna ho ya bat karni h to kaise ho sakti hai?I m big fan of their writing.she is too good writer.