न से नारी ::
उद्धरण : कमला भसीन
अनुवाद और प्रस्तुति : प्रकृति पार्थ

कमला भसीन ( जन्म : 24 अप्रैल 1946) एक भारतीय नारीवादी कार्यकर्ता, कवि, लेखिका तथा सामाजिक विज्ञानी हैं। लैंगिक असमानता की प्रकृति एवं कारणों को समझना तथा इसके फलस्वरूप पैदा होने वाले लैंगिक भेदभाव की राजनीति और शक्ति संतुलन के सिद्धांतों पर इसके असर की व्याख्या करना ही भसीन का उद्देश्य रहा है। भसीन अपनी कविता “क्यूंकि मैं लड़की हूं, मुझे पढ़ना है” के लिए प्रसिद्ध हैं। उनका एनजीओ, ‘संगत’, साउथ एशियन नेटवर्क का हिस्सा है और काफ़ी प्रसिद्ध है। इन्होंने अपनी पुस्तिका ‘अंडरस्टैंडिंग जेंडर’ में सेक्स और जेंडर की संकल्पना को साझा किया है। दक्षिणी एशियाई भाषाओं में जहाँ ये दो शब्द एक ही संबंध में प्रयोग किए जाते हैं (लिंग), भसीन ने इन्हें ‘प्राकृतिक लिंग’ और ‘सामाजिक लिंग’ की श्रेणियों में अलग कर के बताया है। उन्होंने लिंग और स्त्री से संबंधित जटिल प्रश्नों के उत्तर दिए, ‘स्त्री और विकास’ और ‘लिंग और विकास’ में अंतर, और लिंग और पितृसत्ता जैसे गंभीर समस्याओं पर तर्क किया है।

— प्रकृति पार्थ

कमला भसीन

भाषा पितृसत्तात्मक है और इसलिए लिंग सम्बन्धी पक्षपात और असमानताओं को प्रतिबिंबित करता और ढोता है। अक्सर पुरुषों की अपनी एक शब्दावली होती है जो स्त्रियां कभी-कभी ही उपयोग करती हैं। इसके सबसे प्रत्यक्ष उदाहरण हैं यौनार्थी गालियाँ, जो आमतौर पर पुरुष उपयोग करते हैं।

पैतृक प्रधानता (मर्दवादी प्रधानता) के कई पहलू उत्पीड़क हैं, लेकिन इनमें आपसी दायित्वों (mutual obligations) का एक समूह भी शामिल है और अक्सर इसे दमनकारी नहीं माना जाता है। इसीलिए इन्हें पहचानने में और इनसे लड़ने में दिक्कत होती है।

अगर एक स्त्री खाना पका सकती है तो एक पुरुष भी, क्यूंकि स्त्री अपनी कोख से नहीं पकाती।

पुरुषों के बराबर होने के लिए औरतों को उनसे दोगुना अच्छा होना पड़ता है। भाग्यवश ये कठिन नहीं है।

समाज में श्रम के लैंगिक विभाजन को चुनौती देने का अर्थ है समाज में एक “पुरुष” या “महिला” होने के अर्थ को चुनौती देना।

महिलाओं की स्थिति, पद और भूमिका को बदलने के लिए पुरुषों की स्थिति, पद और भूमिका में एक समान परिवर्तन की आवश्यकता है। दोनों आपस में जुड़े हुए हैं और उनके बीच एक सत्ता-सम्बंध है।

महिलाओं का स्थान सदन है। इसलिए उन्हें संसद के दोनों सदनों में होना चाहिए।

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प्रकृति पार्थ कवि हैं और पटना विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रही हैं। उनसे prakritiparth04@gmail.com पर बात हो सकती है। इन्द्रधनुष के साप्ताहिक स्तम्भ ‘न से नारी’ के अंतर्गत स्त्री-विमर्श के प्रमुख हस्ताक्षरों के रचना-संसार से हम आपको निरन्तर साक्षात्कार करवा रहे रहे हैं। हमारी विशेष टीम ‘द फेनोमेनल वीमेन’ द्वारा प्रस्तुत इस स्तम्भ की अन्य प्रस्तुतियों के लिए यहाँ देखें : न से नारी

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