कविताएँ /
POEMS

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कहानियाँ /
STORIES

  • स्वप्न बुक - गद्य:: सौरभ पांडेय स्वप्न बुक "एक पक्षी के मरने पर कितने आसमान समाप्त हो जाते हैं" - नवारुण भट्टाचार्य सारी…
  • एक पुरानी पाण्डुलिपि - कहानी :: फ्रांज़ काफ़्का हिंदी अनुवाद : श्रीविलास सिंह  ऐसा लगता है कि हमारे देश की सुरक्षा व्यवस्था में बहुत…
  • उदासी एक मंजर है - कहानी :: अविनाश पीड़ा का एक शाश्वत सिद्धांत है कि उसकी तय समय-सीमा होती है, जिसके बाद वह निर्जीव हो…
  • स्केच - कहानी :: सौरभ पाण्डेय 1 मैं पेंसिल की लकीरों में छुपा हुआ पापा का पुराना चेहरा देख रहा था. अब…
  • घृणा - कहानी :: परवीन फैज़ जादा मलाल अनुवाद और प्रस्तुति : श्रीविलास सिंह "यह पूरे चार किलो है।" जब उसने ये…

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अनुवाद / TRANSLATIONS

  • Resistance of the Man who is Alone - Poems:: Kumar Ambuj Translations: Anchit Kumar Ambuj is well known for his deep investigations of power centres and the exploitative…
  • Jesus Christ was not a woman - Poems: Anamika Translations: Anchit Known for her intellectual deliberations and sentimental excursions of the female psyche among other things, Anamika…
  • यही वह शहर है जो तुमने खो दिया - कविता :: कैरोलिन फोर्शे अनुवाद : अंचित इल्या कमिन्स्की यूक्रेनियन-अमेरिकी कवि हैं. कैरोलिन फ़ोर्शे अमेरिकी कवि हैं और यह कविता…
  • सारे आकर्षण रौशनी और परछाईं से बने हैं - उद्धरण :: लियो टॉलस्टॉय अनुवाद एवं प्रस्तुति : उत्कर्ष लियो टॉलस्टॉय [१८२८-१९१०] रूस के महानतम लेखक माने जाते हैं और…
  • लड़कियाँ कोई मशीन नहीं हैं - स्त्री संसार :: उद्धरण : सिल्विया प्लाथ अनुवाद, चयन एवं प्रस्तुति : प्रिया प्रियदर्शिनी सिल्विया प्लाथ एक अमेरिकी कवि, उपन्यासकार…

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लेख /
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नए पत्ते/ NEW LEAVES

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संपादकीय/ EDITORIAL

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छोटी-छोटी लहरों पर तैरते हुए

मात्सुओ बाशो के कुछ हाइकु :: अनुवाद एवं प्रस्तुति : अमित तिवारी मात्सुओ बाशो (1644-94) एक महान जापानी कवि थे जो हाइकु काव्य विधा के जनक माने जाते हैं। ये एडो युग के सबसे प्रख्यात कवि रहे हैं। इनका जन्म एक समुराई परिवार में हुआ था। बचपन का नाम मात्सुओ किनसाकू था जो बड़े होने पर मात्सुओ चुएमॉन मुनेफुसा हुआ। 1680 में उनके एक शिष्य ने उन्हें बाशो यानी केले का पेड़ उपहार में दिया जिसके बाद वे बाशो नाम...

सबके दरवाज़े देखता हुआ

नए पत्ते:: कविताएँ : रौशन पाठक ढूँढती हूँ तुम में, तुमको। जब भी तुमसे मिलता हूँ, तुम मेरी कमीज़ पर कुछ ढूँढती हो। कुछ रेशे, कुछ धागे, उलझे सवाल और कुछ रौशनी के दाग़। दूर बैठकर निहारती हो मेरा चेहरा और पास बैठे ढूँढती हो मेरे स्वेटर में अधबुने, टूटे, काटे गए धागे। जैसे ढूँढती है एक बंजारिन बारिश में सूखी लकड़ियाँ। जैसे कुम्हारिन चुनती है माटी से कंकर, और बाशिंदे पौधों से कपास। चुनती हुई तुम, भर...

इस दुनिया का चेहरा सियाह हुआ पड़ा था

कविताएँ :: पीयूष तिवारी ब्लैकबोर्ड उसकी स्मृतियों में अमिट पंक्तियाँ थीं लिखी जा चुकी पंक्तियों पर लिखी जा रही पंक्तियों का दुहराव था पुरातत्वविदों ने पहचानी थी उसपर उग आई काई की वज़ह से उसकी प्राचीनतम इच्छा काई, प्राचीनतम नहीं थी मगर उनका उगना एक प्राचीनतम घटना थी अमूमन उसे पानी होना था लोटे से छलके तो ज़मीन पी ले उसे तो सिर्फ़ बुझानी थी सबकी प्यास यह स्पष्ट भी कितना अस्पष्ट था कि जो ख़ुद घिरा...

हसरतों के शहर देखेंगे हमारी ओर

कविताएँ :: सारुल बागला शहर और तुम 1. हसरतों के शहर देखेंगे हमारी ओर अपनी प्यासी आँखों से एक प्यास हमारे जिस्म की बेचैनी नहीं देख सकती। 2. तुम आ सको तो शहर के इस कोने तक आना इस शहर के इस तरफ मैं रहता हूँ गहरी गली में तुम आओगी तो थोड़ा बाहर निकल कर आऊँगा। 3. हमारी आदत छूट गयी जादू देखने की मदारी और बंदर दोनों बैठते हैं साथ साथ मुझे तुम्हारी आँखों में अब कुछ नहीं दिखाई देता। 4. शहर भीगा है तो...

इनका यही डर हमारी जीत है

कविताएँ :: सूर्यस्नात त्रिपाठी 1. मेरे शरीर को पिघलाकर तुम बनाना चाहते हो एक मौन और निस्प्रभ आकाश— स्मारक उस सुबह का जो मैंने देखा ही नहीं। परंतु मैं चाहता हूँ, मेरे अवर्त्तमान में मेरे अवयव किसी नादान बच्चे का खिलौना बन जाएं, मेरी आँखें किसी के लिए दर्पण बनें, मेरी अस्थियाँ वंशी बन जाएं, और मेरी छाती पर लेट कर तितलियाँ थकान मिटाएं। अपनी संकीर्णता में बंदी तुम क्या जानो, मैं जब पिघलूंगा शीतल...