कविताएँ :: ज्योति रीता कहानी की नायिका दुनिया के किसी भी कैलेंडर में औरतों के लिए छुट्टी शब्द दर्ज़ नहीं था अपने शौक़ को जीने वाली औरतें महान थीं नीम अंधेरी रात में जला आती थीं दीया इतिहास में दर्ज़…
नए पत्ते :: कविताएँ: सत्यव्रत रजक भूखे बच्चे का कथन है एक परछाईं रोटियों पर उभर रही है गिट्टी डालते मजूर के बच्चे से टकराती है तमाचे की तरह बच्चा चिल्लाता है : “भूख चुप रहने की क्रिया नहीं है…
लेख :: उमर “लाखों लोग पलक झपकते ही अपनी रोज़ी-रोटी खो देंगे चूल्हों में आग नहीं होगी और तवा उलटा रखा होगा” यह पंक्तियाँ ही आज की हक़ीक़त हैं। यही सच है जो लगातार और भयावह होता जा रहा है।…
लेख :: मधुरिमा सीवान की धरती पर बहती घाघरा और गंडक, ये सिर्फ़ नदियाँ नहीं, इस दोआबा के अनगिनत सोतों से फूट कर अग्निलीक की धारा बनी है। आर्थिक, सामाजिक परिदृश्य में लोकजीवन की शीतलता और जेठ की दुपहरिया में…
लेख :: संजय कुंदन प्रस्तुत लेख, सौमित्र मोहन की सम्पूर्ण कविताओं के संग्रह ‘आधा दिखता वह आदमी’ के प्रकाशन के तुरंत बाद एक पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। यह लेख न सिर्फ़ सौमित्र मोहन की कविताओं के विभिन्न पहलुओं को…
