कहानी :: निशांत पचखा जेठ की सुबह कुछ ऐसी होती थी कि पूरा गाँव एकसाथ जागकर अपनी-अपनी ड्योढ़ी पर आ खड़ा होता था। पूरब दिशा में सूर्य जब तक अपनी पूरी लालिमा बिखेरता उसके पहले ही गाँव के सभी लोग…

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नए पत्ते :: कविताएँ : अविनाश भाषा की पेंचकसी बसी-बसाई क्रूरतम भाषा को मथ कर उस संगीतात्मकता का निर्माण जिसे साहित्यिक कहते फिरें— होगी यह किसी कुंजी की खुराफ़ात। उस संगीत को इस तरह बजाया गया जैसे धुन ने ही…

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कहानी :: चक्र : जोर्ग लूई बोर्हेस अनुवाद और प्रस्तुति : श्रीविलास सिंह जोर्ग फ़्रांसिस्को इसिडोरो लुइस बोर्हेस एकेवेडो का जन्म २४ अगस्त, १८९९ को और मृत्यु १४ जून, १९८६ को हुई। वे अर्जेंटीना के प्रसिद्ध कहानीकार, निबंधकार, कवि और…

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कोरोना साहित्य :: कहानी : फणीश्वर नाथ रेणु महामारी में साहित्य को देखने-समझने-पढ़ने के कॉंटेक्स्ट काफ़ी बदले हैं. पुराने साहित्य को भी नयी दृष्टि से देखा जा सकता है. रेणु की यह कहानी उसी का एक उदाहरण है. उनकी तीक्ष्ण…

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न से नारी :: उद्धरण : चिमामंडा गोज़ी अडिची अनुवाद और प्रस्तुति : सृष्टि चिमामंडा गोज़ी अडिची सुप्रसिद्ध अफ्रीकी लेखिका हैं। उन्होंने अपनी किताबों में बहुत सी अहम बातों का ज़िक्र किया है। उन्होंने लोगों के भाषा को प्रयोग करने…

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