प्रतिसंसार :: मतभेद की कला : आदित्य शुक्ल  पिछले दिनों अंग्रेजी के दो शब्द मीडिया में छाए रहे – डिसेंट (dissent) और अर्बन नक्सल (urban naxal). अर्बन नक्सल को फिलहाल अपने विमर्श के दायरे से बाहर रखते हुए मतभेद और…

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लोग और लोग :: जंगल में सामुदायिक रंगमंच और रेबेका : हृषीकेश सुलभ वह सन 2013 के अक्तूबर महीने की ढलती हुई दोपहर थी. जब मैं स्वप्निल के साथ बर्कली से चला, सेन फ्रांससिको के समुद्र–तट से रोज़ उठनेवाला कुहासा खाड़ी…

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कविताएँ :: गायक : शहंशाह आलम (१). मैं बादलों के बताए हुए रास्तों पर चलकर सुबह की सैर कर रहा था छाता संभाले आँखों में नए-नायाब मंज़र को उतारता गायक बारिश गा रहा था बस मेरे लिए पड़ोस की लड़की…

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लेख :: नसीरुद्दीन शाह और केदारनाथ सिंह : संजय कुंदन नसीरुद्दीन शाह अभिनय के उस्ताद हैं तो केदारनाथ सिंह कविता के दिग्गज. इनमें कोई समान बात क्या हो सकती है! मेरे लिए है. एक समय था, जब ये दोनों मेरे सिर…

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