यायावरी : अंचित कलकत्ता जाने की तैयारी मैं जाने कब से कर रहा था. मेरी पहली प्रेयसी के गिटार की आवाज़ सन बारह से मुझे पुकार रही थी, उसका भेजा एक-एक गीत थोड़ा और रवीन्द्र को पास लाता. मुझे बेलूर…
Poem :: Upanshu of the bygone days i do not remember much only that the leaves were of a shade i’m used to i say used to and yet the last it rained i saw it the leaves from the…
कविता : संजय कुन्दन एक था कवि एक था अकवि दोनों एक ही शरीर में रहते थे कवि कविताएं लिखता और बिखरा देता अकवि उन्हें सहेजता और भेज देता पत्रिकाओं में कवि दिन भर भटकता शहर की गलियों में रात…
संस्मरण : संजय कुन्दन मुक्तिबोध की कविताओं से पहली बार सामना होने पर झटका लगा, बिल्कुल बिजली के करंट जैसा. उन दिनों मैंने मैट्रिक (दसवीं) की परीक्षा पास की थी और इंटर में मेरा दाखिला पटना कॉलेज में हुआ था….
One Poem : Neha Verma A writer’s dilemma is a dilapidated construction of images formed with words that neither stick together nor fall apart, and are ready to engulf that very existence of the bard. The lush tranquil view ,…
