कहानी :: गंध : अपर्णा अनेकवर्णा सपनों की गंध नहीं होती.. या होती हो शायद, जो छूट जाती है नींद के उस पार.. साथ आती है बस तेज़ी से मिटती स्मृति. फिर कोई सपना देखा था उसने और इस बार…

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साक्षात्कार :: अरुण कमल से विश्वजीत सेन कविता के साथ ‘साम्यवाद’ विचारधारा को देखने के पीछे कोई अंतर्निहित कारण है क्या ? जहां मैं समझता हूँ ‘साम्य’ शब्द एक राजनैतिक अर्थ रखता है. फ्रांस की क्रांति के साथ यह शब्द…

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लेख: प्रभात रंजन प्रणीत  आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई। कल रात टीवी ऑन कर सोफे पर बैठते हुए आदतन न्यूज देखने के लिये चैनल बदलने लगा, एक के बाद एक कर सारे हिंदी चैनल का भ्रमण कर…

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