कविताएँ :: गुंजन उपाध्याय पाठक जीत रेंगते घसीटते खुद ही की देह को घुटने टिकाकर बैठा आहत विस्मृत है भविष्य तुम्हारी मानसिक विक्षिप्त स्थिति से जहाँ खुद की ही आवाज़ तुम तक नहीं पहुंचती, तुम शोर को ठूंस देना चाहते…

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कविताएँ :: तनुज यदि कोई विचार आपको कन्विन्स करता है तो हो जाइए : शशि प्रकाश यदि कोई प्यार तुम्हें बहुत दिनों तक सालता जा रहा है, तो बहुत इन्तज़ार करते हुए बड़े फैसले लेने में कोई देरी नहीं करनी…

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कहानी:: जुलिओ कोर्टाज़ार अंग्रेजी से अनुवाद: श्रीविलास सिंह हमें मकान पसंद था, पुराना और काफी खुला होने के अतिरिक्त (ऐसे समय में जब पुराने मकान उन की विनिर्माण सामग्रियों की लाभदायक नीलामी की वजह से गिराए जा रहे थे), इसमें…

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नए पत्ते कविताएँ :: अपूर्वा श्रीवास्तव कई सदियों की उदासी पीढ़ी दर पीढ़ी उतरती है उदासी स्त्रियों के भीतर जिम्मेदारियाँ सौंपते हुए पुरखिनें सौंप देती हैं अपने हिस्से की उदासी भी जैसे उन्हें सौंपा गया होगा कभी जिसे ढोते वे…

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नए पत्ते:: कविताएँ: सार्थक दीक्षित राष्ट्रीय प्रवक्ता  वो सबसे अधिक जानकारी रखने वाले लोग थे उन्हें मालूम थीं सबसे बेहतर और अधिक तकनीकें जिनसे वो कर सकते थे प्रधानसेवक के सेवा-भाव का बचाव उनके शब्दकोश में थे सबसे अधिक नफरती…

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