नए पत्ते कविताएँ :: अपूर्वा श्रीवास्तव कई सदियों की उदासी पीढ़ी दर पीढ़ी उतरती है उदासी स्त्रियों के भीतर जिम्मेदारियाँ सौंपते हुए पुरखिनें सौंप देती हैं अपने हिस्से की उदासी भी जैसे उन्हें सौंपा गया होगा कभी जिसे ढोते वे…

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नए पत्ते:: कविताएँ: सार्थक दीक्षित राष्ट्रीय प्रवक्ता  वो सबसे अधिक जानकारी रखने वाले लोग थे उन्हें मालूम थीं सबसे बेहतर और अधिक तकनीकें जिनसे वो कर सकते थे प्रधानसेवक के सेवा-भाव का बचाव उनके शब्दकोश में थे सबसे अधिक नफरती…

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नए पत्ते:: कविताएँ: केतन यादव   बैकअप स्मृतियाँ तुम्हारे प्रेम की क्षतिपूर्ति स्वरूप मिलीं जो तुम्हारे होने का भ्रम बनाए रखती हैं सदा। बाँट लेता हूँ  तुम्हारी अनुपस्थिति फेसबुक, इंस्टाग्राम से हर स्क्रोल में दिख जाता है हमारा साथ बिखरा…

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नए पत्ते:: कविताएँ: नीरज   वसंत अभागों को प्रेम होता है— पतझड़ में उनकी ओर ईश्वर लौटते हैं‌ हाथ में फूल लिए तो वसंत आता है। निवेदन जिनके हिस्से में मॉं नहीं हैं हे ईश्वर! तुम उनको मुझसे ज्यादा ही…

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नए पत्ते:: कविताएँ: अनिकेत कुमार   मौन और तुम्हारे शब्द का साथ रात हो चुकी है, मन शांत हैं मेरा, आवाज नहीं आ रही आस पास, शायद मन तुम्हारी आवाज का इंतजार कर रहा। शायद मन तुम्हारी खुसफुसाहट का इंतजार…

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