What dreams may come :: A very brief thought on Time : Upanshu The possibility of perfect recall, of recounting memories exactly as the events went down, is an implausible thought for beings that are fundamentally subjective in their cognitive…
कविता : तारानन्द वियोगी मैथिली से अनुवाद : अविनाश छूटना मुझे खेद है कि मैं आपके साँचे पर खरा नहीं उतर पाया ! मैंने अब तक देरीदा को नहीं पढ़ा फूको का कोई सिद्धान्त मुझे याद नहीं सचमुच मैं शर्मिन्दा हूँ…
कहानी :: प्रभात मिलिंद “पहला प्यार जैसे महकी बयार…. पहला प्यार लाए जीवन में बहार….पहला प्यार….”. जब कभी टेलीविजन खोलती हूँ तो किसी साबुन के विज्ञापन में ये जिंगल्स अकसर सुनाई पड़ते हैं. बहरहाल प्यार और साबुन का आपस में…
कविताएँ:: पंखुड़ी सिन्हा फसलों का मालिक एक अजीब बात है खेती के सम्बन्ध में. जैसे नितांत अपरिचित एक शहर में जाकर एक कमरा किराए पर लिया जा सकता है विदेश में भी जाकर वैसे एकदम अपरिचित गाँव में खेत नहीं…
कहानी :: अनघ शर्मा ये रात आज कुछ ज़्यादा गरम है या वो चूल्हे के एकदम पास बैठी है इसलिए उसे गर्मी कुछ ज़्यादा लग रही है वो समझ नहीं पाई. चूल्हा हालाँकि बुझ चुका था और कंडों की आंच…
