गुनाहों का देवता पढ़ते हुए : शुभम कुमार गुनाहों का देवता..!  पढ़ने वाले दो-तीन दोस्तों ने कई बार बताया  कि गुनाहों का देवता एक कालजयी उपन्यास है और इसे जरूर पढ़ लेनी चाहिए. पर मैं जब-कभी  इस किताब को पढ़ने…

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कहानी :: अवधेश प्रीत ‘तू सोता क्यों नहीं? नींद नहीं आ रही क्या?’ आवाज में खीझ थी, बेचैनी की हद तक। ‘हाँ नींद नहीं आ रही। हर कोशिश करके देखी ली।’ प्रत्युत्तर में, उभरे स्वर की लाचारी छुपी न रह…

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कहानी :: पाप बट्टा पुण्य : सुधाकर रवि “उस बुढ़िया को समझा दो, हमसे झगड़ा मोल लेना ठीक नहीं होगा।“ “अब क्या कहें मोहन बाबू, उस रमरतिया को कितना बार समझाए कि मोहन बाबू की दूकान के सामने से अपना…

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