कविताएँ :: शुभम नेगी मैं गिरा हूँ माँ की कोख से ठीक-ठीक कहाँ कहा जा सकता है कि गिरता हुआ आदमी टकरा ही जाएगा फ़र्श से कभी हो सकता है गिरना एक सतत प्रक्रिया हो! सब जन्मते हैं मैं गिरा…

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कविताएँ :: आदर्श भूषण  युद्ध से पहले इबादतगाहों में― सजीव प्रार्थनाएँ थीं ईश्वर के पास नहीं थी करुणा दफ़्तरों से― जा चुके थे खटुआ कर्मचारी और ग़ायब हो गया था एक रोज़नामचा हाज़िरी की फ़ाइलों पर पुस्तकालयों में― दीमक चाट…

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कहानी:: फ्रांज़ काफ़्का हिंदी अनुवाद: श्रीविलास सिंह ऐसा लगता है कि हमारे देश की सुरक्षा व्यवस्था में बहुत बातों की अनदेखी की गयी है। अभी के पहले तक इस बात के प्रति हम स्वयं कभी चिंतित नहीं हुए थे और…

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साक्षात्कार :: कृष्ण कल्पित हिंदी के जाने-माने कवि हैं। हाल ही के दिनों में उनका एक कविता-संग्रह “रेख़्ते के बीज” राजकमल प्रकाशन से आया है। इंद्रधनुष के प्रधान सम्पादक अंचित ने कृष्ण कल्पित के साथ ये छोटी सी बातचीत की…

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कविताएँ :: अभिनव श्रीवास्तव विवशता जबकि वापसी की सब संभावनाएं खुली थीं मैं वापस नहीं लौटा जबकि बहुत कुछ था मेरे पास कहने को मैं चुप रहा जबकि याद रखने को था बहुत कुछ मैंने सब कुछ विस्मृत हो जाने…

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