कविता-भित्ति :: सागर के उस पार : गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही (१८८३-१९७२) का जन्म उत्तर प्रदेश राज्य के उन्नाव जिले के हडहा गाँव में हुआ था। इन्होंने प्रारंभिक शिक्षा के दौरान ही हिंदी, उर्दू और फ़ारसी का ज्ञान…

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कविताएँ :: सागर मेरे पास जवाब है कुछ भी नया नहीं रहता हरेक नया, किसी भी वक्त पुराना हो सकता है न्यूनतम समय की देरी, किसी बहुत नए को किसी से पुराना बताने में सक्षम है, सवाल यह है कि…

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कविताएँ :: विजय राही उदासी फूलों के खिलने का एक मौसम होता है और मुरझाने का भी लेकिन कुछ फूल ऐसे होते हैं— जिनके खिलने का कोई मौसम नही होता जिनके मुरझाने का कोई सबब नही होता वे अनायास मुरझा…

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कविता-भित्ति :: कर्मवीर : अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ (15 अप्रैल, 1865 – 16 मार्च, 1947) हिंदी काव्य-संसार के सुप्रतिष्ठित हस्ताक्षर हैं। निजामाबाद जिला- आजमगढ़ (उत्तरप्रदेश) के निवासी हरिऔध आरंभ में ब्रजभाषा में कविताएँ लिखते थे और…

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कविताएँ :: अनुराग अनंत 1). एक बरसात से दूसरी बरसात तक जाते हुए बीच में मिलती है सर्दी और गर्मी बहुत से लोग, उनकी प्यास उदास कुत्ते और उनकी भूख बेहाल परिंदे और उनके क्षतिग्रस्त पंख एक नदी और उसकी…

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