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राजेश कमल सुचर्चित कवि हैं। 'अस्वीकार से बनी काया' शीर्षक से उनका एक काव्य-संग्रह प्रकाशित-प्रशंसित है। इंद्रधनुष की इस प्रस्तुति में यहाँ उनकी तीन कविताएँ (१. जयंती २. मेरा नायक ३. ईश्वर) कवि के स्वर में प्रस्तुत है।
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कविता-भित्ति

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अगस्त 20, 2023

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इंद्रधनुष

इंद्रधनुष

साहित्य के सब रंग

समाज में तेज़ी से विविधताओं और प्रतिरोध की विभिन्न संस्कृतियों पर हमले बढ़े हैं और साहित्य समेत सभी कलाओं पर राजसत्ता का प्रभाव क़ाबिज़ होता जा रहा है। जो स्वीकृति का तिरस्कार करता है उसे मिटा दिया जाता है। ऐसे में सच को सच की तरह कहना, संस्कृतियों के भीतर मौजूद अंतर्विरोधों को व्यापक रूप से समझना-देखना और शोषक तंत्रों की कारगुज़ारियों को साहित्यिक अन्वेषणों से उजागर करना और इन तंत्रों की मनमानियों की आलोचना ही इंद्रधनुष का उद्देश्य है। दर्ज करना और याद रखना।


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