कविताएँ :: प्रदीप्त प्रीत आमंत्रण पाँच गुना चार की खिड़की से एक भरा-पूरा आकाश खुला है औंधे मुँह पड़ी है एक कूरा मिट्टी अवसन्न भभकती हुई दुःख और संत्रास में ताप से छिटकती हुई इस मिट्टी को इंतजार है तुम्हारी…

Continue Reading

कविताएँ : तो हू अनुवाद : अरुण कमल झाड़ू की आवाज गर्मी की रात जब कीड़ों की आवाज़ भी सो चुकी है। मैं सुनता हूँ ‘त्रान फू’ पथ पर नारियल के झाड़ू की आवाज़ इमली के पेड़ों को नींद से…

Continue Reading

कविताएँ :: गुंजन उपाध्याय पाठक जीत रेंगते घसीटते खुद ही की देह को घुटने टिकाकर बैठा आहत विस्मृत है भविष्य तुम्हारी मानसिक विक्षिप्त स्थिति से जहाँ खुद की ही आवाज़ तुम तक नहीं पहुंचती, तुम शोर को ठूंस देना चाहते…

Continue Reading

कविताएँ :: तनुज यदि कोई विचार आपको कन्विन्स करता है तो हो जाइए : शशि प्रकाश यदि कोई प्यार तुम्हें बहुत दिनों तक सालता जा रहा है, तो बहुत इन्तज़ार करते हुए बड़े फैसले लेने में कोई देरी नहीं करनी…

Continue Reading

कहानी:: जुलिओ कोर्टाज़ार अंग्रेजी से अनुवाद: श्रीविलास सिंह हमें मकान पसंद था, पुराना और काफी खुला होने के अतिरिक्त (ऐसे समय में जब पुराने मकान उन की विनिर्माण सामग्रियों की लाभदायक नीलामी की वजह से गिराए जा रहे थे), इसमें…

Continue Reading