नए पत्ते:: कविताएँ: सार्थक दीक्षित राष्ट्रीय प्रवक्ता वो सबसे अधिक जानकारी रखने वाले लोग थे उन्हें मालूम थीं सबसे बेहतर और अधिक तकनीकें जिनसे वो कर सकते थे प्रधानसेवक के सेवा-भाव का बचाव उनके शब्दकोश में थे सबसे अधिक नफरती…
नए पत्ते:: कविताएँ: केतन यादव बैकअप स्मृतियाँ तुम्हारे प्रेम की क्षतिपूर्ति स्वरूप मिलीं जो तुम्हारे होने का भ्रम बनाए रखती हैं सदा। बाँट लेता हूँ तुम्हारी अनुपस्थिति फेसबुक, इंस्टाग्राम से हर स्क्रोल में दिख जाता है हमारा साथ बिखरा…
नए पत्ते:: कविताएँ: नीरज वसंत अभागों को प्रेम होता है— पतझड़ में उनकी ओर ईश्वर लौटते हैं हाथ में फूल लिए तो वसंत आता है। निवेदन जिनके हिस्से में मॉं नहीं हैं हे ईश्वर! तुम उनको मुझसे ज्यादा ही…
नए पत्ते:: कविताएँ: अनिकेत कुमार मौन और तुम्हारे शब्द का साथ रात हो चुकी है, मन शांत हैं मेरा, आवाज नहीं आ रही आस पास, शायद मन तुम्हारी आवाज का इंतजार कर रहा। शायद मन तुम्हारी खुसफुसाहट का इंतजार…
लेख:: संजय कुंदन मंगलेश डबराल ने अपनी कविताओं में अमानवीयता के विरुद्ध एक साधारण मनुष्य के संघर्ष को चित्रित किया। रघुवीर सहाय ने उनकी कविताओं के बारे में लिखा है, “उनकी कविताएं…अपने ही तरीके से लड़ते हुए आदमी की…
