आलेख :: अंचित एक कवि, एक इंजिनियरिंग संस्थान में क्या करेगा? यह एक प्रश्न कई प्रश्नों की पीठ पर खड़ा है जिनको आगे खुलना है। क़िस्सा वहाँ शुरू होता है कि आईआईटी गुवाहाटी की साहित्यिक संस्था के निमंत्रण पर मैं…

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समीक्षा :: अरुण श्री “डरा नहीं हूँ मैं हजारों अस्वीकारों से बनी है मेरी काया हजारों बदरंग कूंचियों ने बनायी हैं मेरी तस्वीर हजारों कलमों ने लिखी है एक नज़्म जिसका उनवान है मुस्कराहट और वे मेरी मुस्कुराहटें नहीं छीन सकते” संकलन की प्रतिनिधि कविता में कवि की यह घोषणा पढ़ते हुए यह अनुमान हो जाता है कि कवि कितने ताप दाब  के बाद यह आकार पा सका होगा। ताप और…

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कविताएँ :: सुधीर सुमन मृत्यु और जीवन के बीच मृत्यु फेरे लगा रही दूर भाग रहे वे जिंदगी की छटपटाहट लिए जो बड़े फिक्रमंद थे दामन छुड़ाकर जा रहे न जाने किस जीवन की ओर॰ कोई संग मरने का खतरा…

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गद्य :: राकेश कुमार मिश्र कला, साहित्य और संगीत : कुछ नोट्स (1.) कला को जीने का समय सबसे महत्वपूर्ण समय है. इसका मतलब ये नहीं कि कला के दूसरे क्षणों का महत्व नहीं है. कला की ‘तैयारी’ मुझे कला…

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कहानी:: ज़ोहरा सईद अनुवाद: श्रीविलास सिंह   जब मैं दस साल की थी, मेरी ही उम्र की मेरी एक सहेली थी जिसका नाम सकीना था। जब हम मित्र थे, उस समय मेरे परिवार में छः बेटियाँ थीं। तब तक मेरे…

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