कविताएँ :: अमर दलपुरा रास्ते में मिल गया था हमने नहीं कहा था अलविदा हम अलग हो चुके थे एक-दूसरे के जीवन से हम खो चुके थे धूल कणों की तरह हम नहीं बता पाए समाज और पिताओं को एक-दूसरे…

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कविता :: अमन त्रिपाठी तुम बहुत वर्षों की मेरी पृथ्वी वह— प्रकृति का सारा ‌अदृश्य और सारा दृश्य— प्रकृति-स्वरूपा! उसकी ‌कोशिकाओं का‌ बनना-टूटना फूलों का खिलना-मुरझाना उससे ‌गुजरना महाअरण्य से गुजरना उसने यानी प्रकृति ने एक बार सोचा, कि इस…

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स्त्री संसार :: उद्धरण : सिमोन द बोउवा अनुवाद, चयन एवं प्रस्तुति : स्मृति चौधरी सिमोन द बोउवा फ्रेंच अस्तित्ववादी दार्शनिक, लेखक, सामाजिक सिद्धान्तकार, और स्त्रीवादी थीं जिन्होंने बीसवीं सदी में स्त्रीवादी आंदोलन को एक नया रूप दिया। उन्होंने आधुनिक…

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कविताएँ :: तनुज ज्योति के लिए वसंत आँखों को चुभता हुआ पार हो रहा है, एक भारी दरार आ चुकी थी मेरे माथे के ऊपर तुमने फेरी थी जिस दिन दुनिया की सबसे मुलायम उंगलियाँ बहुत कम उम्र में बहुत…

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संस्मरण :: कवि रमाकान्त रथ से मिलना : सतीश नूतन ‌हम श्रद्धा से जब कोई कार्य ठान लेते हैं तो प्रतिफल निश्चित ही अच्छा होता है। उड़ीसा जाना-आना लगा रहता है और साहित्यजीवी होने के कारण स्वतः ही एक नाता…

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