कविताएँ :: पाब्लो नेरूदा अनुवाद एवं लेख : रामकृष्ण पाण्डेय नेरूदा का अनुवाद अनुवाद कर्म को कुछ लोग हेय दृष्टि से देखते हैं। और कुछ लोग प्रशंसा के भाव से। मुझे लगता है कि अनुवाद करना एक सामाजिक कृत्य है।…

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उद्धरण : जूलिया क्रिस्तेवा अनुवाद एवं प्रस्तुति : सृष्टि जूलिया क्रिस्तेवा प्रसिद्ध दार्शनिक, विचारक, आलोचक और मनोविश्लेषक हैं. हाल के दिनों में उन्होंने एक उपन्यास भी लिखा है. उन्होंने बार्थ जैसे बड़े भाषा विज्ञानी-चिंतकों के साथ काम किया है और उनके…

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कविताएँ :: रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’ कविता और लाठी तुम मुझसे हाले-दिल न पूछो ऐ दोस्त! तुम मुझसे सीधे-सीधे तबियत की बात कहो. और तबियत तो इस समय ये कह रही है कि मौत के मुंह में लाठी ढकेल दूं, या…

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न से नारी :: कविताएँ : मीना कंदासामी अनुवाद एवं प्रस्तुति : स्मृति चौधरी मीना कंदासामी की कविताएं हमारे समाज में अंतर्निहित जाति–व्यवस्था के खिलाफ प्रतिरोध हैं. जातिवाद और पितृसत्ता से पीड़ित, कंदासामी अपनी कविताओं में एक दलित महिला होने…

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