डायरी :: तोषी पांडेय आज से ४ साल पहले मेरे थेरिपिस्ट ने यह घोषित कर दिया था की मुझे पी टी एस डी है. यानि पोस्टट्रामेटिक डिसऑर्डर. आज से चार साल पहले ये जानना और अब उसको पलट के देखना…

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कविताएँ :: पाब्लो नेरूदा अनुवाद एवं लेख : रामकृष्ण पाण्डेय नेरूदा का अनुवाद अनुवाद कर्म को कुछ लोग हेय दृष्टि से देखते हैं। और कुछ लोग प्रशंसा के भाव से। मुझे लगता है कि अनुवाद करना एक सामाजिक कृत्य है।…

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उद्धरण : जूलिया क्रिस्तेवा अनुवाद एवं प्रस्तुति : सृष्टि जूलिया क्रिस्तेवा प्रसिद्ध दार्शनिक, विचारक, आलोचक और मनोविश्लेषक हैं. हाल के दिनों में उन्होंने एक उपन्यास भी लिखा है. उन्होंने बार्थ जैसे बड़े भाषा विज्ञानी-चिंतकों के साथ काम किया है और उनके…

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कविताएँ :: रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’ कविता और लाठी तुम मुझसे हाले-दिल न पूछो ऐ दोस्त! तुम मुझसे सीधे-सीधे तबियत की बात कहो. और तबियत तो इस समय ये कह रही है कि मौत के मुंह में लाठी ढकेल दूं, या…

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