कहानी :: सौरभ पाण्डेय 1 मैं पेंसिल की लकीरों में छुपा हुआ पापा का पुराना चेहरा देख रहा था. अब पापा का चेहरा बहुत बदल गया है. मेरी उनसे कभी कोई खास घनिष्ठता नहीं रही, वजह कुछ खास नहीं, शायद…

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न से नारी :: उद्धरण : जर्मेन ग्रियर अनुवाद एवं प्रस्तुति :  प्रकृति पार्थ जर्मेन ग्रियर (जन्म 1939) का जन्म ऑस्ट्रेलिया में हुआ था और अब वे इंग्लैंड में रहती हैं. उनकी पुस्तक ‘द फीमेल यूनक‘ (1970) के प्रकाशन ने…

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सुमित झा की कविताएँ : तुम्हारे शहर में   1. लौट कर आने के बाद चीजें वैसी नहीं मिलती पटना घूमते हुए पाया कि यहाँ की भागती दौड़ती सड़कों पर लोगों की भीड़ में मैं अब अकेला हूँ. मेरी हथेलियाँ ढूंढती…

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