कविताएँ :: पार्वती तिर्की करम चंदो (करम के मौसम में खिलने वाले चाँद को ‘करम चंदो’ कहा जाता है। यह सितम्बर का महीना होता है जब छोटानागपुर का आदिवासी समुदाय ‘करम’ का त्यौहार मानता है। इस त्यौहार में ‘करम चंदो’…

Continue Reading

समीक्षा :: दिव्या श्री देवेश पथ सारिया युवा कवि, कथेतर गद्य लेखक होने के साथ विश्व कविताओं के अनुवाद में भी सक्रिय हैं। फिलवक्त वे ताइवान में कार्यरत हैं। देवेश पथ सारिया द्वारा अनुवादित ताइवान के वरिष्ठ कवि ली मिन-युंग…

Continue Reading

लेख :: अंत का दृश्य और अदृश्य : अंचित नींद के तंग आकाशों की जमी हुई गर्द से भारी हो उठी है यह छाती. नमक-जैसे मैले संगमरमर का बादल मेरी आँखों में कब तक गड़ता-घुलता जाएगा? — शमशेर  …दृश्य में…

Continue Reading

कविताएँ :: गोलेन्द्र पटेल जोंक रोपनी जब करते हैं कर्षित किसान; तब रक्त चूसते हैं जोंक! चूहे फसल नहीं चरते फसल चरते हैं साँड और नीलगाय… चूहे तो बस संग्रह करते हैं गहरे गोदामीय बिल में! टिड्डे पत्तियों के साथ…

Continue Reading

लेख :: अंत का दृश्य और अदृश्य : अंचित सब जानते हैं पासों का पलटना तय है सब जानते हैं और फिर भाग्य पर दांव लगाते हैं सब जानते हैं युद्ध ख़त्म हो गया सब जानते हैं अच्छे लोग हार…

Continue Reading