कविताएँ :: आदित्य रहबर मीडिया वो आदमी के जैसा दिखता है लोग कहते भी हैं उसके हाथ, देह और चाल-ढ़ाल भी बिल्कुल आदमी जैसे ही हैं समाज के लोगों ने उसे आईने की संज्ञा दे रखी है कहते हैं— सब…

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नए पत्ते :: कविताएँ : विभा परमार उदासी चूंकि सर्दियों का उदास मौसम अब जा चुका है और अपने पीछे छोड़ गया है पतझड़, जो झड़ रहा है क्षण-क्षण शायद इस क्षण-क्षण में मैं भी झड़ी जा रही हूँ उन सूखी…

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कविताएँ :: प्रभात ऐसा क्या हो गया ऐसा क्या था कि वह मुझे देखे बिना रह नहीं सकती थी ऐसा क्या था कि मैं उसे देखे बिना रह नहीं सकता था ऐसा क्या था कि वह मेरे ही बारे में…

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उद्धरण : आंद्रे आसिमान चयन, अनुवाद और प्रस्तुति : अंचित आंद्रे आसिमान इतालवी-अमेरिकन लेखक हैं और अमेरिका में रहते, पढ़ाते हैं। ‘कॉल मी बाई योर नेम’ उनका चर्चित उपन्यास है। यह सत्रह साल के लियो और चौबीस साल के ऑलिवर…

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कविता-भित्ति :: सागर के उस पार : गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही (१८८३-१९७२) का जन्म उत्तर प्रदेश राज्य के उन्नाव जिले के हडहा गाँव में हुआ था। इन्होंने प्रारंभिक शिक्षा के दौरान ही हिंदी, उर्दू और फ़ारसी का ज्ञान…

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