श्री विलास सिंह की कविताएँ :: 1. एक उदास गीत कई बार मन होता है कि किसी मुलायम हरे पत्ते पर लिख दिया जाय तुम्हारा नाम, जो मुलायम है उस पत्ते की ही तरह। नदी के किनारे बैठ देर तक…
उद्धरण :: टोनी मोरिसन अनुवाद और प्रस्तुति : उत्कर्ष मैं अपने छात्रों से कहती हूँ, जब तुम्हें वो नौकरियां मिलती हैं जिसके लिए तुम सभी ने इतनी तैयारी की है तो यह याद रखो कि तुम्हारा असली काम है, अगर…
नए पत्ते:: ऋतु त्यागी की कविताएँ: ठगों की सभा और उसकी पीठ ठगों की सभा में वह कछुए की तरह खड़ी थी उसकी पीठ पर ठगों ने लाद दिए थे ठगी के कारनामे सभा अपनी इस कार्यवाही के बाद स्थगित…
गद्य : उत्कर्ष बंदीगृह के झरोखे से :: भाग :१ यहाँ कोई गौरैया नहीं दिखाई देती. यहाँ कोई कोयल भी नहीं. हालाँकि जिसने कभी गौरैया ना देखा हो, या कोयल की कूक भी ना सुनी हो, इस अनुभव के स्वाद…
NEW LEAVES :: Poems : RIDHIKA SINGH IMMORTALITY OF LITERATURE! Poetry and instincts along a burgeoning park and monotonous path Lang, Frost and Atticus abide Allen Dahl to Sylvia Plath How well do you decipher the ambiguity of literature? Often…
