राजेश कमल की कविताएँ :: 1. एक रूठे हुए दोस्त के लिए ये खुशियों के पल निठल्ले नहीं हैं बुहार ले जायेगा वक़्त इन्हें और हम देखते रह जायेंगे हाथ हिलाते रह जायेंगे यूँ ही और इन विरल लम्हों में…
संपादकीय :: प्रभात प्रणीत महात्मा गांधी की 150 वीं सालगिरह को इस साल उत्सव के तौर पर मनाया जा रहा है, देवी-देवताओं और त्योहारों के इस देश में यह कोई असाधारण घटना नहीं है। असंख्य उत्सवों के बीच एक और…
श्री विलास सिंह की कविताएँ :: 1. एक उदास गीत कई बार मन होता है कि किसी मुलायम हरे पत्ते पर लिख दिया जाय तुम्हारा नाम, जो मुलायम है उस पत्ते की ही तरह। नदी के किनारे बैठ देर तक…
उद्धरण :: टोनी मोरिसन अनुवाद और प्रस्तुति : उत्कर्ष मैं अपने छात्रों से कहती हूँ, जब तुम्हें वो नौकरियां मिलती हैं जिसके लिए तुम सभी ने इतनी तैयारी की है तो यह याद रखो कि तुम्हारा असली काम है, अगर…
नए पत्ते:: ऋतु त्यागी की कविताएँ: ठगों की सभा और उसकी पीठ ठगों की सभा में वह कछुए की तरह खड़ी थी उसकी पीठ पर ठगों ने लाद दिए थे ठगी के कारनामे सभा अपनी इस कार्यवाही के बाद स्थगित…
