उद्धरण :: टोनी मोरिसन अनुवाद और प्रस्तुति : उत्कर्ष मैं अपने छात्रों से कहती हूँ, जब तुम्हें वो नौकरियां मिलती हैं जिसके लिए तुम सभी ने इतनी तैयारी की है तो यह याद रखो कि तुम्हारा असली काम है, अगर…

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नए पत्ते:: ऋतु त्यागी की कविताएँ: ठगों की सभा और उसकी पीठ ठगों की सभा में  वह कछुए की तरह खड़ी थी  उसकी पीठ पर ठगों ने लाद दिए थे  ठगी के कारनामे सभा अपनी इस कार्यवाही के बाद स्थगित…

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गद्य : उत्कर्ष बंदीगृह के झरोखे से :: भाग :१ यहाँ कोई गौरैया नहीं दिखाई देती. यहाँ कोई कोयल भी नहीं. हालाँकि जिसने कभी गौरैया ना देखा हो, या कोयल की कूक भी ना सुनी हो, इस अनुभव के स्वाद…

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संपादकीय :: बालमुकुन्द गए कुछ वर्षों से कई साहित्यिक-सांस्कृतिक आयोजनों का प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से साक्षी बनता रहा हूँ। आम तौर पर ऐसे आयोजन भाषा, साहित्य, संस्कृति, इतिहास जैसे विभिन्न विषय केन्द्रित होते हैं लेकिन इन आयोजनों में गाहे-वगाहे एक प्रश्न,…

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