विनोद विट्ठल की कविताएँ ::  1.अड़तालीस साल का आदमी अड़तालीस की उम्र अस्सी प्रतिशत है ज़िंदगी का आख़िर के आधे घंटे की होती है फ़िल्म जैसे चाँद के साथ रात के आसमान में टँक जाती है कुछ चिंताएँ गीतों की…

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सुशील कुमार भारद्वाज की कहानी ‘धर्म’ “आप क्यों नहीं खाना चाहते हैं?  मैं अच्छा खाना नहीं बनाती , इसलिए?” सोफिया की ये बात मुझे निरुत्तर कर गई .  मैं सोच में पड़ गया कि आखिर क्या कहूँ उससे?  नहीं खाऊंगा…

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भगवतीचरण वर्मा के कुछ उद्धरण :: भगवतीचरण वर्मा (३० अगस्त १९०३ – ५ अक्टूबर १९८८) हिंदी के ख्यात लेखकों में से हैं. हिंदी कविता में छायावाद के बाद रचनाकर्म में अभूतपूर्व बदलाव लाने में और इसे नई दृष्टि देने में इन्होनें बड़ी भूमिका निभाई है….

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‘मेरा दागिस्तान’ से कुछ उद्धरण :: प्रस्तुति :: स्मृति चौधरी रसूल हमजातोव ने कहा था “कविगण इसलिए पुस्तकें लिखते हैं कि लोगों को युग और अपने बारे में, आत्मा की हलचल के बंध में बांध सकें, उनको अपनी भावनाओं और…

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