अरुण कमल की कुछ काव्य-पंक्तियाँ :: चयन और प्रस्तुति : स्मृति चौधरी   अरुण कमल के काव्य-संसार से मेरा पहला परिचय तब हुआ था जब मैं स्कूल में थी। ‘नए इलाके में’ हमारी हिंदी पाठ्यक्रम का भाग हुआ करता था।…

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प्रधान सम्पादक की चिट्ठी :: प्यारे दोस्तों इंद्रधनुष की औपचारिक शुरुआत हुए आज एक वर्ष हो गया. पिछला एक साल कई तरह की चुनौतियों, अनुभवों और संतुष्टियों को देने वाला रहा. सबसे पहले तो संस्था के तौर पर, हमलोग नए…

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विनोद विट्ठल की कविताएँ ::  1.अड़तालीस साल का आदमी अड़तालीस की उम्र अस्सी प्रतिशत है ज़िंदगी का आख़िर के आधे घंटे की होती है फ़िल्म जैसे चाँद के साथ रात के आसमान में टँक जाती है कुछ चिंताएँ गीतों की…

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सुशील कुमार भारद्वाज की कहानी ‘धर्म’ “आप क्यों नहीं खाना चाहते हैं?  मैं अच्छा खाना नहीं बनाती , इसलिए?” सोफिया की ये बात मुझे निरुत्तर कर गई .  मैं सोच में पड़ गया कि आखिर क्या कहूँ उससे?  नहीं खाऊंगा…

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