कहानी:: ज़ोहरा सईद अनुवाद: श्रीविलास सिंह   जब मैं दस साल की थी, मेरी ही उम्र की मेरी एक सहेली थी जिसका नाम सकीना था। जब हम मित्र थे, उस समय मेरे परिवार में छः बेटियाँ थीं। तब तक मेरे…

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कविताएँ :: सत्यम तिवारी 1. आँसू जितनी रात है जलने पर ही ख़त्म होगी जितनी बात है कहने पर ही खत्म होगी दीया जलेगा बातों का कुँआ चुक जाएगा नमी ही जन्म देगी नमी को भागीरथ ढूंढ लाओ एक बूंद…

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कहानी :: अनघ शर्मा तूतनखामेन तुम्हारी नब्ज़….किस कलाई में चल रही है!! 1 धांय से गोली छूटती है और चीथड़े हवा में बिखर जाते हैं…….. परिंदे घबरा के चुप हो जाते हैं.  फिर जब उनके हवास कायम होते हैं तो…

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कविता :: अरुण श्री सारे उत्सव स्थगित मैं प्रेम में हूँ कि मछली है कोई नदी के बाहर और जिन्दा है। तुम साथ हो मेरे कि मैं साथ के स्वप्न में हूँ। बारिश की कोई बूँद नहीं टपकी हमारे होठों…

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कविताएँ :: कपिल भारद्वाज 1. मेरे देश एक निर्णय करना ही होगा तुम्हें कि चाँद सिर के ऊपर से जब गुजरे तो उसके दोनों सींग पकड़कर अपने कमरे में घसीट लाओ और तब तक बंदी बनाकर रखो जबतक पक्षियों का…

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