कहानी :: अनघ शर्मा तूतनखामेन तुम्हारी नब्ज़….किस कलाई में चल रही है!! 1 धांय से गोली छूटती है और चीथड़े हवा में बिखर जाते हैं…….. परिंदे घबरा के चुप हो जाते हैं. फिर जब उनके हवास कायम होते हैं तो…
कविता :: अरुण श्री सारे उत्सव स्थगित मैं प्रेम में हूँ कि मछली है कोई नदी के बाहर और जिन्दा है। तुम साथ हो मेरे कि मैं साथ के स्वप्न में हूँ। बारिश की कोई बूँद नहीं टपकी हमारे होठों…
कविताएँ :: कपिल भारद्वाज 1. मेरे देश एक निर्णय करना ही होगा तुम्हें कि चाँद सिर के ऊपर से जब गुजरे तो उसके दोनों सींग पकड़कर अपने कमरे में घसीट लाओ और तब तक बंदी बनाकर रखो जबतक पक्षियों का…
आलेख :: उपांशु भारत में हुए हालिया किसान आंदोलन को कई तरह से पढ़ा गया है। उन पाठों में एक पाठ यह भी है जो किसान आंदोलन के आसपास की परिस्थिति को लेखक के शब्दों को ‘अनपैक’ करता है। यह…
Poems:: Kumar Ambuj Translations: Anchit Kumar Ambuj is well known for his deep investigations of power centres and the exploitative machinery these hegemonic centers create and promote. His poetry becomes the agency of the voiceless and supports the struggle of…
