उद्धरण :: महात्मा गांधी शरीर का सुख कैसे मिले, यही आज की सभ्यता ढूँढती है, और वो यही देने की कोशिश करती है। यह भी नहीं मिल पाता। • सत्याग्रह सर्वोपरि बल है। • मुझे प्रधानमंत्रियों से द्वेष नहीं है,…
कविताएँ :: पार्वती तिर्की करम चंदो (करम के मौसम में खिलने वाले चाँद को ‘करम चंदो’ कहा जाता है। यह सितम्बर का महीना होता है जब छोटानागपुर का आदिवासी समुदाय ‘करम’ का त्यौहार मानता है। इस त्यौहार में ‘करम चंदो’…
समीक्षा :: दिव्या श्री देवेश पथ सारिया युवा कवि, कथेतर गद्य लेखक होने के साथ विश्व कविताओं के अनुवाद में भी सक्रिय हैं। फिलवक्त वे ताइवान में कार्यरत हैं। देवेश पथ सारिया द्वारा अनुवादित ताइवान के वरिष्ठ कवि ली मिन-युंग…
लेख :: अंत का दृश्य और अदृश्य : अंचित नींद के तंग आकाशों की जमी हुई गर्द से भारी हो उठी है यह छाती. नमक-जैसे मैले संगमरमर का बादल मेरी आँखों में कब तक गड़ता-घुलता जाएगा? — शमशेर …दृश्य में…
कविताएँ :: गोलेन्द्र पटेल जोंक रोपनी जब करते हैं कर्षित किसान; तब रक्त चूसते हैं जोंक! चूहे फसल नहीं चरते फसल चरते हैं साँड और नीलगाय… चूहे तो बस संग्रह करते हैं गहरे गोदामीय बिल में! टिड्डे पत्तियों के साथ…
