कहानी  :: श्रीविलास सिंह सड़क दूर-दूर तक सुनसान थी। किसी आदमी का कहीं कोई नामो-निशान नहीं। सन्नाटा बिलकुल तने हुए तार की भांति, हल्की-सी चोट पड़ते ही चीख पड़ने को आतुर था। कहीं कोई चिड़िया, कोई जीव भी नहीं, कोई…

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कविताएँ :: विष्णु पाठक धोलावीरा के प्रतीक आषाढ़ की एक सुबह मैं करूँगा यात्रा तुम्हारी तलाश में कच्छ के रण के बीचो बीच बसे उस नगर की ओर जहाँ चाँद के डूबते सब हो जाता है श्वेत-शांत जहाँ खारा है…

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कविताएँ :: स्मिता सिन्हा स्मिता की पहचान एक संवेदनशील कवि की है। उनकी कविताएँ अपनी संवेदनाओं के लिए पहचानी जाती हैं। यहाँ प्रकाशित कविताओं में अपने समय की सत्ता-व्यवस्था के प्रतिरोध में खींची व्यंग्य की एक लकीर के भीतर संवेदना…

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लेख :: अंचित मुझे किताब तक पहुँचने में समय लगा। मैंने किताब के बारे में सुना था। चर्चा भी थी लेकिन समकालीन हिन्दी उपन्यासों के साथ चल रहे एक बहुत अग्रेसिव प्रचार तंत्र की वजह से मन में एक पूर्वाग्रह…

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