कविताएँ :: पवन कुमार वैष्णव कविता माँ है कठोर से कठोर प्रहार भी सह लेता हूँ, कविताओं को लिखता नहीं जी लेता हूँ. मुझसे अधिक सहती हैं मेरी कविताएँ. मैं वह बच्चा हूँ जिसे हर सिसकी में, कविता ने माँ…

Continue Reading

कहानी :: मकान : डॉ. लवलेश दत्त “ठाकुरदास…ओ ठाकुरदास…” अन्दर आते हुए डाकिये की आवाज़ ने अमरावती को असहज कर दिया। उसने पास बैठी अपनी दस वर्षीया बेटी कीर्ति को संबोधित करते हुए उत्तर दिया, “जा…डाकिया ताऊ के लै कुस्सी…

Continue Reading

कविताएँ :: अभिषेक आखिरी किताब तुम्हारे ताखे पर रखी सभी किताबों के नीचे जो सबसे आखिरी किताब है न- मैं वही किताब हूँ। मुझे आज भी याद है जिस दिन तुम मुझे पूरे बाजार से ढूंढ कर लाई थी फिर…

Continue Reading

जॉन रस्किन के कुछ विचार :: चयन एवं प्रस्तुति : उत्कर्ष जॉन रस्किन ( जन्म: 8 फ़रवरी 1819-मृत्यु: 20 जनवरी 1900 ) इंग्लैंड के जाने-माने विचारक, लेखक और दार्शनिक थें, जिन्होंने भूविज्ञान, वास्तुकला, मिथक, पक्षीविज्ञान, साहित्य, शिक्षा, वनस्पति विज्ञान और…

Continue Reading