कहानी:: अप्रेम : अनिल यादव अपने भीतर नक्षत्रों को छिपाए होने का भ्रम पैदा करते कंप्यूटरों से झरते हल्के नीले प्रकाश और बीसियों जोड़ी आंखों में अनगिनत भावनाओं के रूप में परावर्तित उनकी आभा के बीच एक संक्षिप्त प्रेम कहानी…

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कविताएँ :: ज्योति शोभा निर्गुण का राग अत्यधिक दूरी है कलकत्ते से उसके शहर की इसलिए वह भेजता है मेघ , काले और घने जैसे उसके रोम है वक्षों पर. मैं यह बात साफ़ कहती हूँ उसके दूत से ,…

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समीक्षा : : प्रभात मिलिंद संदर्भ : अनिल अनलहातु का सद्य प्रकाशित कविता संग्रह ‘बाबरी मस्जिद तथा  अन्य कविताएँ‘ ..’यही कारण है कि/मेरी कविताएँ अपने/अकेलेपन के कटघरे से होकर/बूमरैंग की भाँति/वापस लौट आती हैं/अपने निभृत एकांत में/मैं जानता हूँ कि/कुछ…

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प्रतिसंसार :: आदित्य शुक्ल मूलभूत प्रस्ताव: हम सबके पास सत्य है इसीलिए किसी के पास सत्य नहीं है. जब भी कोई विमर्श शुरू होता है वह इसी मूलभूत मान्यता से अस्तित्व में आता है कि वह आपको सत्य तक पहुंचा…

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