कविताएँ :: कैलाश मनहर धतूरे का फूल धतूरे के फूल को निहार रहा हूँ बहुत देर से छोटी-सी सफेद दुंदुभि खुल-खिल रही है पँखुड़ियाँ दमक रही हैं पूरी श्वेताभा के साथ मैं स्वयं को रोक पाने में असमर्थ हूँ अभी…
कविताएँ :: सत्यम तिवारी डंडी तराजू-बटखारे में उलझे हुए हैं तुम्हारे हाथ किसी के हाथ में पतंग है कोई एम्बुलेंस से हाथ हिलाता है किसी का हाथ कट चुका है तुम्हारे जीवन में से ये किसने डंडी मार ली? नौसिखिया…
न से नारी :: उद्धरण : अनाईस नीन अनुवाद एवं प्रस्तुति : सृष्टि अनाईस नीन एक फ्रेंच – क्यूबन – अमेरिकन लेखिका थीं। इन्होंने ज़्यादातर डायरी और जर्नल की विधा में काम किया। नीन साहित्य जगत में अपने प्रेमकाव्य की…
कविताएँ :: विजय बागची सूखे फूल जो पुष्प अपनी डाली पर ही सूखते हैं, वो सिर्फ एक जीवन नहीं जीते, वो जीते हैं कई जीवन एक साथ, और उनसे अनुबद्ध होती हैं, स्मृतियाँ कई पुष्पों की, जो रहीं अपूर्ण, असंतृप्त;…
कविताएँ :: शुभम नेगी मैं गिरा हूँ माँ की कोख से ठीक-ठीक कहाँ कहा जा सकता है कि गिरता हुआ आदमी टकरा ही जाएगा फ़र्श से कभी हो सकता है गिरना एक सतत प्रक्रिया हो! सब जन्मते हैं मैं गिरा…
