कविताएँ :: अनुराग अनंत 1). एक बरसात से दूसरी बरसात तक जाते हुए बीच में मिलती है सर्दी और गर्मी बहुत से लोग, उनकी प्यास उदास कुत्ते और उनकी भूख बेहाल परिंदे और उनके क्षतिग्रस्त पंख एक नदी और उसकी…

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कविता-भित्ति :: माखनलाल चतुर्वेदी की कविता: ‘कितनी मौलिक जीवन की द्युति’ माखनलाल चतुर्वेदी (४ अप्रैल १८८९-३० जनवरी १९६८) का जन्म मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले में बाबई नामक स्थान पर हुआ था। वे ओजस्वी भाषा के कवि, लेखक और प्रतिष्ठित…

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कविता-भित्ति :: मैथिलीशरण गुप्त की यशोधरा से एक काव्य-खंड सखि, वसन्त-से कहाँ गये वे, मैं उष्मा-सी यहाँ रही। मैंने ही क्या सहा, सभी ने मेरी, बाधा-व्यथा सही। तप मेरे मोहन का उद्धव धूल उड़ाता आया, हा! विभूति रमाने का भी…

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कविता-भित्ति :: श्रीधर पाठक की कविता सुंदर भारत सुंदर भारत 1. भारत हमारा कैसा सुंदर सुहा रहा है शुचि भाल पै हिमाचल, चरणों पै सिंधु-अंचल उर पर विशाल-सरिता-सित-हीर-हार-चंचल मणि-बद्धनील-नभ का विस्तीर्ण-पट अचंचल सारा सुदृश्य-वैभव मन को लुभा रहा है भारत…

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