कविता :: प्रशांत विप्लवी बोलीविया और कोस्टारिका के लोगों मैं मेराडोना हूँ आश्वस्त रहो मुझ पर विश्वास करो मैं उन तमाम देशों का भी प्रतिनिधित्व करता हूँ जिन्हें फुटबॉल खेलने से रोका जाता है जिन्हें फुटबॉल से प्यार है जिनके…

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कविताएँ :: रोमिशा आदिम गीत उसको देखते ही मोरपंखी सी लौ काँप उठी मन में ठीक वैसे ही जैसे हवा के छूते ही काँपता है कोई पत्ता और मेरी डबडबाई आँखें उसके खुले ओंठो को चूमकर गाने लगी एक गीत…

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कविता :: वायलिनें : महमूद दरवेश अनुवाद : अंचित महमूद दरवेश किसी परिचय के मोहताज नहीं है. हिंदी में उनकी कई कविताएँ पहले ही अनूदित हैं. एड्वर्ड सईद पर लिखी उनकी लम्बी कविता जलसा में छपी थी. समय समय पर…

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