राजकमल चौधरीक किछु मैथिली कविता :: हम कविता लिखइ छी, सदत अपना हेतु मात्र अपनेटा हेतु… अहिपन अहिपन मे नहि लिखू फूल पात-लता-चक्र हे स्वप्न-संभवा कामिनी, आब नहि घोरू सिनूर आ उज्जर पिठार! जखन पूर्णिमेक साँझ मे चन्द्रमा भ’ गेल…

Continue Reading

गद्य :: उत्कर्ष सब ठीक बा न? आशा बा, रउआ सब कुशल-मंगल से होखब आ हंसत-मुस्कात जीवन के पावल-छूटल में लागल होखब. रउआ सब सोचत होखब कि ई डायरी शीर्षक के आलेख, चिट्ठी-पत्री के रूप में कान्हे आरम्भ होता. ई…

Continue Reading